Chhattisgarh Private Schools: छत्तीसगढ़ में अंग्रेजी माध्यम के प्राइवेट स्कूलों का जाल जिस तेजी से फैला है, उतनी ही तेजी से इनके अंदर छिपा फर्जीवाड़ा भी अब खुलकर सामने आने लगा है। बड़े-बड़े चमकदार भवन, टाई-बेल्ट की ड्रेस और फर्राटेदार अंग्रेजी का दावा करने वाले इन स्कूलों की असलियत यह है कि यहाँ पढ़ाने वाले ज्यादातर शिक्षकों के पास न तो नियमानुसार योग्यता है और न ही वे ठीक से अंग्रेजी बोल पाते हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) द्वारा स्कूलों की आंतरिक गुणवत्ता और मान्यता को लेकर कड़ाई शुरू करते ही यह मुद्दा पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।
सरकारी स्कूलों में सख्त नियम, प्राइवेट में धड़ल्ले से धांधली
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने माशिमं के इस सख्त कदम की तारीफ करते हुए राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग की दोहरी नीति पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा का कहना है कि एक तरफ सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति कड़ी प्रतियोगी परीक्षा के जरिए होती है। वहाँ मिडिल स्कूल के लिए अंग्रेजी में ग्रेजुएशन और बीएड, जबकि हाई व हायर सेकेंडरी के लिए संबंधित विषय में पीजी के साथ व्यावसायिक डिग्री अनिवार्य है। दूसरी तरफ, अधिकांश प्राइवेट स्कूल अपना मुनाफा बढ़ाने के चक्कर में महज 5 से 8 हजार रुपये के मामूली मानदेय पर अप्रशिक्षित (अनट्रेंड) युवाओं से बच्चों को पढ़वा रहे हैं। यह उन लाखों अभिभावकों की गाढ़ी कमाई और उम्मीदों के साथ सीधा खिलवाड़ है, जो अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य की आस में भारी-भरकम फीस चुकाते हैं।
28 साल पुराने सरकारी शिक्षकों पर TET का बोझ, प्राइवेट पर चुप्पी क्यों?
टीचर्स एसोसिएशन ने शिक्षा विभाग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले 28 सालों से पढ़ा रहे सरकारी शिक्षकों पर तो शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करने का बेजा दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन दूसरी ओर प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता की कभी जांच तक नहीं की जाती। आज तक न तो लोक शिक्षण संचालनालय, न ही संभागीय संयुक्त संचालक (JD) या जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) दफ्तरों ने प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों के शैक्षणिक दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया है। अधिकारियों की इसी लापरवाही के कारण निजी स्कूल प्रबंधन बेखौफ होकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
1 मार्च 2027 से समान नियम लागू करने की पुरजोर मांग
टीचर्स एसोसिएशन ने सरकार के समक्ष मांग रखी है कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र को ध्यान में रखते हुए फिलहाल कार्यरत शिक्षकों को इस साल छूट दी जाए। हालांकि, 1 मार्च 2027 से शुरू होने वाले आगामी शैक्षणिक सत्र से प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों के लिए भी सरकारी शिक्षकों की तर्ज पर 100% अनिवार्य योग्यता और व्यावसायिक दक्षता लागू की जानी चाहिए। साथ ही, प्रदेश में 'समान शिक्षा, समान नीति' की व्यवस्था बनाने और पढ़ाई का स्तर जांचने के लिए एक निष्पक्ष 'टास्क फोर्स' का गठन किया जाए।
"राज्य गठन के बाद यह पहला मौका है जब माध्यमिक शिक्षा मंडल ने निजी स्कूलों की असली कमजोरी पर प्रहार किया है। इन स्कूलों के बाहरी आकर्षण के पीछे पढ़ाई का स्तर और शिक्षकों की योग्यता पूरी तरह से शून्य है। जब तक सरकारी और निजी—दोनों तरह के स्कूलों में शिक्षकों के लिए एक समान योग्यता के मापदंड लागू नहीं होंगे, तब तक छत्तीसगढ़ में शिक्षा का वास्तविक सुधार संभव नहीं है।" — संजय शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन

