समुद्र में घिरता चीन : अमेरिकी थ्री-सीज घेराबंदी से बीजिंग में मची खलबली, चीनी विशेषज्ञों ने दी बड़ी चेतावनी
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है। चीनी रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि अमेरिका दक्षिण चीन सागर, ताइवान जलडमरूमध्य और पूर्वी चीन सागर में अपनी नौसैनिक मौजूदगी मजबूत कर चीन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
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कीर्तिमान न्यूज
22 Jul 2026, 10:30 AM
बीजिंग
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में वर्चस्व की जंग अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। चीन के रणनीतिक और रक्षा विशेषज्ञों ने बीजिंग को सचेत किया है कि अमरीकी नौसेना ने तीन मुख्य समुद्री रास्तों (चोकप्वाइंट्स) पर घेराबंदी सख्त कर दी है। अमरीका की इस बढ़ती सैन्य मौजूदगी और आक्रामक रणनीति से निपटने के लिए चीनी विशेषज्ञों ने अपनी समुद्री एजेंसियों और विभागों को तुरंत एक साथ आकर बड़ा कदम उठाने की सलाह दी है।
बीजिंग फॉरेन स्टडीज यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर यू शेंगसोंग ने हाल ही में प्रकाशित अपने एक शोध पत्र में अमरीका के नए पैंतरे का पर्दाफाश किया है। उनके मुताबिक, वॉशिंगटन ने तीन बेहद संवेदनशील इलाकों—दक्षिण चीन सागर (South China Sea), ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) और पूर्वी चीन सागर (East China Sea)—में अपनी नौसैनिक ताकत और युद्धपोतों की तैनाती काफी बढ़ा दी है।
क्षमता से ज्यादा संसाधनों को खर्च करना
अमरीका इस पूरी व्यूह रचना को 'थ्री सीज लिंकेज' (Three Seas Linkage) रणनीति का नाम दे रहा है। चीनी रणनीतिकारों का मानना है कि इसका सीधा मकसद चीन को एक साथ कई मोर्चों पर उलझाना है, ताकि बीजिंग अपनी क्षमता से ज्यादा संसाधनों को खर्च करने पर मजबूर हो जाए। ये तीनों रणनीतिक जलमार्ग 'फर्स्ट आइलैंड चेन' का हिस्सा हैं, जो कुरील द्वीप समूह से शुरू होकर जापान, ताइवान और फिलीपींस होते हुए बोर्नियो तक फैलते हैं।
नौसैनिक मौजूदगी आवाजाही पर लगाम लगाने की कोशिश
चीन इन तीनों समुद्री रास्तों पर अपना एकाधिकार या ऐतिहासिक दावा ठोकता आया है। हालांकि, जापान, फिलीपींस और वियतनाम जैसे पड़ोसी देश भी इन इलाकों पर अपना-अपना दावा पेश करते हैं। अमरीका अब इन प्रवेश द्वारों पर अपनी स्थिति मजबूत कर चीनी नौसेना की आवाजाही पर लगाम लगाने की कोशिश में है। प्रोफेसर यू ने 'पैसिफिक जर्नल' में लिखा कि अमरीका का यह नौसैनिक विस्तार चीन की नौसैनिक विस्तार योजनाओं के लिए बड़ी रुकावट बन रहा है। उन्होंने सिफारिश की है कि चीन को अब कूटनीतिक, सैन्य, कानूनी, खुफिया और संचार—सभी मोर्चों पर एक एकीकृत (Cross-Departmental) तंत्र बनाना होगा।
अमरीका ने बदली सोच
जब तक चीन अपनी तमाम सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और संयुक्त कार्रवाई का सिस्टम तैयार नहीं करेगा, तब तक वह अमरीका का मुकाबला प्रभावी ढंग से नहीं कर पाएगा। ऐतिहासिक रूप से अमरीका एशिया-प्रशांत के विवादों को अलग-अलग देखता था—जैसे जापान के साथ पूर्वी चीन सागर का विवाद अलग, ताइवान की संप्रभुता का मुद्दा अलग और दक्षिण चीन सागर का बहुपक्षीय विवाद अलग। लेकिन अब अमरीकी सोच बदल चुकी है।
संयुक्त गश्त ने बढ़ाई चिंता
चीनी विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि अमरीका अब 'नेस्टेड अलायंस नेटवर्क' यानी आपस में गुंथे हुए मित्र देशों के जाल पर काम कर रहा है। इसके तहत वह अपने सहयोगियों (जैसे जापान और फिलीपींस) को उनके पारंपरिक दायरों से बाहर निकालकर एक-दूसरे के साथ सहयोग करने के लिए प्रेरित कर रहा है। हाल ही में जापान की कड़ा रुख अपनाने वाली नई राजनीतिक बयानबाजी और फिलीपींस के साथ अमरीका के संयुक्त गश्त ने चीन की चिंताएं और बढ़ा दी हैं। अमरीकी समर्थन के बल पर ही ये छोटे देश अब दक्षिण चीन सागर और ताइवान के मुद्दे पर चीन को सीधी चुनौती दे रहे हैं।
विवादों को लंबे समय तक खींचने का प्रयास
अमरीका की इस लंबी रणनीति पर बात करते हुए चीनी शोधकर्ताओं ने कहा कि वॉशिंगटन ‘नेविगेशन की स्वतंत्रता’ (Freedom of Navigation) और ‘नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था’ की आड़ में अंतरराष्ट्रीय कानूनों को अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास कर रहा है। अमरीका इन क्षेत्रीय विवादों को लंबे समय तक खींचना चाहता है ताकि कूटनीतिक रास्ते बंद रहें और उसकी खुद की उपस्थिति वहां जायज बनी रहे। बदलते समीकरणों को देखते हुए चीनी विश्लेषकों का कहना है कि बीजिंग को न केवल अमरीका के इस सुरक्षा गठबंधन को तोड़ने की रणनीति बनानी होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून तय करने वाली प्रक्रियाओं में भी खुद आगे बढ़कर नेतृत्व संभालना होगा।