रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक के नागरमुड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खदान के लिए हो रही पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय ग्रामीणों ने जिंदल प्रबंधन पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि बीते एक माह के भीतर क्षेत्र में 40 हजार से अधिक पेड़ काट दिए गए हैं, जबकि वन विभाग से इससे काफी कम संख्या में पेड़ों की कटाई की अनुमति मिली थी। ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस कटाई से क्षेत्र के जंगल और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ रहा है।
पर्यावरण प्रेमी ने लगाए गंभीर आरोप
जन चेतना मंच के संयोजक और पर्यावरण प्रेमी राजेश त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि जिंदल प्रबंधन ने अनुमति की आड़ में नियमों की अनदेखी करते हुए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की है। उन्होंने कहा कि नागरमुड़ा क्षेत्र में सराई और सौगान जैसे महत्वपूर्ण पेड़ बड़ी संख्या में मौजूद थे, लेकिन खदान परियोजना के चलते इन पेड़ों को भी नुकसान पहुंचा है। उनका कहना है कि कभी घने जंगल के रूप में पहचाने जाने वाला यह इलाका अब काफी हद तक प्रभावित हो चुका है।

वन विभाग ने दी अपनी सफाई
वहीं, इस मामले में वन विभाग का कहना है कि पेड़ कटाई की प्रक्रिया नियमों के तहत की जा रही है। घरघोड़ा वन विभाग के एसडीओ आशुतोष मांडवा ने बताया कि जिंदल की प्रस्तावित कोयला खदान के लिए विभाग ने 13,537 पेड़ों की कटाई की अनुमति जारी की है। उन्होंने कहा कि कटाई क्षेत्र में साल समेत कई प्रजातियों के छोटे-बड़े पेड़ शामिल हैं और अनुमति के अनुसार ही कार्रवाई की जा रही है।
लकड़ी परिवहन को लेकर उठे सवाल
स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने आरोप लगाया है कि कटाई के बाद पेड़ों की लकड़ियों को जिंदल प्रबंधन अपने कब्जे में लेकर परिवहन कर रहा है। उनका कहना है कि नागरमुड़ा क्षेत्र, जो पहले हरियाली से भरा हुआ था, अब बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई के कारण बदला हुआ नजर आ रहा है।
ग्रामीणों का विरोध जारी
तमनार ब्लॉक के कई गांवों के ग्रामीण इस पेड़ कटाई का विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार विरोध के बावजूद कटाई का काम जारी है। वहीं, इस मामले में जिंदल पावर के जनसंपर्क अधिकारी पवन शर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कई बार कॉल करने के बाद भी उनका पक्ष नहीं मिल सका।
कांग्रेस की चुप्पी पर उठे सवाल
पेड़ कटाई के मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि पहले इसी क्षेत्र में अन्य कंपनियों की कटाई का विरोध करने वाले कांग्रेस नेताओं ने जिंदल प्रबंधन के मामले में अब तक कोई बड़ा विरोध दर्ज नहीं कराया है।