मऊगंज उपजेल से सामने आए आरोपों ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बंदियों के परिजनों का आरोप है कि जेल प्रहरी तेजवीर शर्मा ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में बंदियों के साथ मारपीट करता है और मुलाकात कराने के नाम पर अवैध रूप से पैसों की मांग भी की जाती है। परिजनों का कहना है कि यदि कोई परिवार पैसे देने से इनकार करता है, तो संबंधित बंदी के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है और उसे प्रताड़ित किया जाता है। इन आरोपों के सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि फिलहाल किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
अचानक बरसी लाठियां
परिजनों ने अपनी शिकायत में बताया कि घटना वाले दिन उपजेल परिसर में साफ-सफाई का कार्य चल रहा था। इसी दौरान करीब आठ बंदी अपने-अपने कंबल लेकर बैरक के बाहर बैठे हुए थे। आरोप है कि उसी समय जेल प्रहरी तेजवीर शर्मा वहां पहुंचा और बिना किसी स्पष्ट कारण या चेतावनी के बंदियों पर लाठियां बरसानी शुरू कर दीं। बताया जा रहा है कि बंदियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और उन्हें लगातार पीटा गया। जब परिजन निर्धारित समय पर मुलाकात करने जेल पहुंचे तो बंदियों ने अपने शरीर पर पड़े चोट के निशान दिखाए और पूरी घटना की जानकारी दी। परिजनों का कहना है कि बंदियों की हालत देखकर वे भावुक हो गए और उन्हें लगा कि जेल के भीतर उनके अपने सुरक्षित नहीं हैं। इस घटना के बाद परिवारों में भारी आक्रोश देखने को मिला।
परिजनों का फूटा गुस्सा
मुलाकात के दौरान जब बंदियों ने अपने हाथ, पीठ और शरीर के अन्य हिस्सों पर पड़े चोट के निशान दिखाए तो परिजनों ने गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि बंदियों ने रोते हुए बताया कि उन्हें बेरहमी से पीटा गया और विरोध करने पर और अधिक प्रताड़ित करने की धमकी भी दी गई। परिजनों का आरोप है कि जेल में बंद व्यक्ति पहले ही अदालत के आदेश के अनुसार सजा काट रहा होता है, ऐसे में उसके साथ शारीरिक हिंसा और अपमानजनक व्यवहार किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। परिवारों ने इस घटना को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।सख्त कार्रवाई की मांग की
घटना के बाद बड़ी संख्या में परिजन कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत में उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी पाए जाने पर संबंधित जेल प्रहरी के खिलाफ कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। परिजनों का कहना है कि यदि जेल के भीतर ही बंदियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। उनका सवाल है कि जेल प्रशासन का दायित्व बंदियों की सुरक्षा और सुधार सुनिश्चित करना है या फिर उन्हें भय और हिंसा के माहौल में रखना। उन्होंने यह भी मांग की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जेलों में निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही को मजबूत किया जाए।
दावों ने बढ़ाई मामले की गंभीरता
मामले के बीच जेल विभाग के एक कर्मचारी ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर कुछ चौंकाने वाले दावे भी किए हैं। कर्मचारी का कहना है कि कई जेलों में मुलाकात के नाम पर अवैध रूप से पैसे लेने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। उसने यह भी दावा किया कि प्रतिबंधित सामग्री जेल के भीतर पहुंचाने के लिए भी अवैध लेन-देन होता है। इतना ही नहीं, कर्मचारी ने यह भी आरोप लगाया कि भारी रकम लेकर महिलाओं को भी जेल परिसर के अंदर पहुंचाने जैसी गतिविधियां संभव होने के दावे किए जाते हैं। हालांकि इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें फिलहाल केवल दावे के रूप में ही देखा जा रहा है। प्रशासनिक जांच के बाद ही इन आरोपों की सच्चाई सामने आ सकेगी।
जेल प्रशासन ने क्या कहा
मऊगंज उपजेल के प्रभारी जेलर ध्रुव नारायण मिश्रा ने बताया कि जैसे ही घटना की जानकारी मिली, तत्काल सभी आठ बंदियों का मेडिकल परीक्षण (एमएलसी) कराया गया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बंदी का बयान दर्ज किया जा रहा है ताकि पूरे घटनाक्रम की वस्तुस्थिति स्पष्ट हो सके। संबंधित जेल प्रहरी तेजवीर शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है और मामले की विस्तृत रिपोर्ट जेल के पदेन अधीक्षक (एसडीएम) को भेज दी गई है। जेल प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से कराई जाएगी और मेडिकल रिपोर्ट सहित सभी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।जेल व्यवस्था पर उठे कई बड़े सवाल
यह मामला केवल आठ बंदियों की कथित पिटाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने पूरे जेल तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वास्तव में बंदियों के साथ मारपीट हुई? क्या मुलाकात के नाम पर अवैध वसूली की जाती है? क्या ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में रहने के आरोप सही हैं? यदि जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं, तो क्या संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे? इन सभी सवालों के जवाब अब प्रशासनिक जांच पर निर्भर हैं।
नतीजों पर टिकी पूरे जिले की निगाहें
फिलहाल मामले में परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों और जेल प्रशासन की ओर से शुरू की गई जांच के बीच पूरे जिले की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। मेडिकल परीक्षण, बंदियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक जेल प्रहरी की जवाबदेही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा। वहीं यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो जांच रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। ऐसे में अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो और सच्चाई सामने आए।