गरीब और जरूरतमंद परिवारों की थाली तक पहुंचने वाला सरकारी राशन आखिर किसके इशारे पर बाजार तक पहुंच रहा है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के चावल की अवैध खरीद-फरोख्त का एक और मामला सामने आया है। केशलूर इलाके से एक पिकअप वाहन में भरकर ले जाए जा रहे पीडीएस चावल को सूचना मिलने के बाद पकड़ा गया। वाहन को जब्त कर कोतवाली थाने लाया गया, जिसके बाद खाद्य विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
इस कार्रवाई के बाद सरकारी राशन व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि राशन दुकानों से निकलकर सरकारी चावल खुले बाजार तक पहुंच रहा है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? क्या यह केवल किसी एक व्यापारी की करतूत है या फिर इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है? ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं कि पात्र हितग्राहियों को पूरा राशन नहीं मिल पाता, जबकि सरकारी अनाज बाजार में बिकता नजर आता है।
पीडीएस व्यवस्था की निगरानी
ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच होने पर कई अहम खुलासे हो सकते हैं। वहीं पूरे मामले में जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि पीडीएस व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभागों की होती है। यदि लगातार सरकारी चावल की हेराफेरी के मामले सामने आ रहे हैं तो निगरानी व्यवस्था में कमी कहां रह गई, इसकी भी जांच जरूरी है। इस संबंध में जिला प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कलेक्टर का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ सका। खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सूचना मिलने के बाद टीम मौके पर पहुंची और बोलेरो पिकअप वाहन की जांच की गई।
25 से 30 बोरी पीडीएस चावल
जांच के दौरान वाहन में बड़ी मात्रा में चावल की बोरियां मिलीं। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक पिकअप में करीब 25 से 30 बोरी पीडीएस चावल रखा हुआ था। बारिश के कारण मौके पर बोरियों की पूरी गिनती नहीं हो सकी, लेकिन विभाग ने वाहन सहित पूरे माल को जब्त कर लिया है। अधिकारियों ने बताया कि मामले में जरूरी दस्तावेजों और चावल के स्रोत की जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह राशन किस दुकान से निकला था और इसे कहां ले जाया जा रहा था। यदि जांच में राशन दुकान संचालकों या अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। प्राथमिक जांच में खाद्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि जब्त किया गया चावल पीडीएस का ही प्रतीत हो रहा है।पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
जांच में सुनील गुप्ता नामक किराना व्यापारी द्वारा इसकी खरीद-बिक्री किए जाने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित व्यापारी के खिलाफ पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि पूर्व में व्यापारी का प्रतिष्ठान सील किया गया था। बाद में कलेक्टर न्यायालय के आदेश पर जुर्माना लगाने के बाद दुकान को दोबारा खोलने की अनुमति दी गई थी। अब एक बार फिर पीडीएस चावल से जुड़े मामले में नाम सामने आने के बाद विभाग पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान मामले दोनों की जांच कर रहा है।
कारोबार पर सख्त कार्रवाई का दावा
खाद्य विभाग ने साफ कहा है कि सरकारी राशन की अवैध खरीद-बिक्री और परिवहन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। विभाग का कहना है कि शासन की प्राथमिकता है कि बीपीएल और अन्य पात्र हितग्राहियों को समय पर और पूरा राशन मिले। इसलिए इस मामले में नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि कार्रवाई के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या जांच केवल जब्त किए गए वाहन और व्यापारी तक सीमित रहेगी या फिर उस पूरी कड़ी तक पहुंचेगी, जहां से सरकारी राशन बाहर निकल रहा है। यदि राशन दुकानों से ही चावल की हेराफेरी हो रही है तो संबंधित दुकानदारों, बिचौलियों और निगरानी व्यवस्था से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच जरूरी होगी।राशन नहीं आने की शिकायतों से बढ़ी चिंता
बस्तर में पीडीएस चावल की अवैध बिक्री का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी समय-समय पर सरकारी राशन की कालाबाजारी और गड़बड़ी की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई ग्रामीणों का आरोप है कि राशन दुकान संचालक उन्हें कई बार यह कहकर वापस भेज देते हैं कि इस महीने राशन नहीं आया है या स्टॉक खत्म हो गया है।
चावल खुले बाजार में बिकने की शिकायतें
वहीं दूसरी ओर वही सरकारी चावल खुले बाजार में बिकने की शिकायतें सामने आती हैं। इससे गरीब परिवारों को मिलने वाले अधिकार पर सीधा असर पड़ता है। अब इस मामले में लोगों की नजर खाद्य विभाग की आगे की कार्रवाई पर है। देखना होगा कि जांच केवल एक वाहन और व्यापारी तक सीमित रहती है या फिर सरकारी राशन के पूरे नेटवर्क का खुलासा कर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाती है।