Egg Price Hike: इथेनॉल की बढ़ती मांग से अंडों की कीमत पर असर चीनी के बाद अब अंडों की बढ़ती कीमतों ने भी आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NECC) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में अंडों के दाम करीब 35 से 40 प्रतिशत तक बढ़े हैं। आने वाले सर्दियों के मौसम में मांग बढ़ने के कारण कीमतों में और तेजी आने की आशंका जताई जा रही है।
फार्म से बाजार तक महंगा हुआ
अंडा रिपोर्ट के मुताबिक, पोल्ट्री फार्म पर एक अंडे की कीमत लगभग 7 रुपए तक पहुंच गई है। वहीं खुदरा बाजार में ग्राहकों को एक अंडा करीब 8.50 से 9 रुपए में मिल रहा है। पिछले पांच महीनों में ही अंडों की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मक्का महंगा होने से बढ़ी पोल्ट्री किसानों की लागत अंडों की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह पोल्ट्री फीड में इस्तेमाल होने वाले मक्के का महंगा होना बताया जा रहा है।
मक्का महंगा होने से बढ़ी पोल्ट्री किसानों की लागत
मक्के का एक बड़ा हिस्सा अब इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके कारण मुर्गियों के चारे के लिए इसकी उपलब्धता प्रभावित हुई है और पोल्ट्री किसानों की उत्पादन लागत बढ़ गई है। NECC से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मक्का पोल्ट्री उत्पादन की कुल लागत में लगभग 65 से 70 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर अंडे और चिकन की उत्पादन लागत पर पड़ता है।
तीन साल में लगभग दोगुनी हुई मक्के की कीमत
ष्करीब तीन साल पहले मक्का लगभग 14 हजार रुपए प्रति टन के भाव पर उपलब्ध था, लेकिन अब इसकी कीमत लगभग 26,500 रुपए प्रति टन तक पहुंच गई है। बढ़ी हुई लागत का बोझ आखिरकार उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है। इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति से बढ़ी मक्के की खपत सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के तहत पेट्रोल में जैव ईंधन मिलाया जा रहा है। इथेनॉल तैयार करने के लिए गन्ने के साथ मक्के का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है।17 मिलियन टन मक्का इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल
वर्तमान में यह मात्रा लगभग 17 मिलियन टन बताई जा रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2030 तक यह आंकड़ा 25 मिलियन टन तक पहुंच सकता है। पोल्ट्री उद्योग मक्के का बड़ा खरीदार पोल्ट्री उद्योग लंबे समय से देश में उत्पादित मक्के का प्रमुख उपभोक्ता रहा है। उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, पोल्ट्री सेक्टर देश के कुल मक्के का करीब 60 प्रतिशत तक इस्तेमाल करता है।
सर्दियों में अंडा-चिकन होगा महंगा
उद्योग से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि घरेलू उत्पादन तेजी से नहीं बढ़ा तो आने वाले वर्षों में आयात और बढ़ सकता है। सर्दियों में और बढ़ सकती है कीमत सर्दियों के दौरान अंडों की खपत सामान्यतः बढ़ जाती है। ऐसे में चारे की ऊंची लागत और बढ़ती मांग दोनों मिलकर कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना सकती हैं। यदि मक्के की आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में अंडे के साथ चिकन भी महंगा हो सकता है।मक्के की बढ़ती मांग से बदली तस्वीर
निर्यातक से आयातक बनता भारत मक्के की बढ़ती घरेलू मांग का असर भारत के विदेशी व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। पहले भारत बांग्लादेश और वियतनाम सहित कई देशों को मक्का निर्यात करता था। अब पोल्ट्री और इथेनॉल उद्योग की बढ़ती जरूरतों के कारण देश को मक्का आयात करना पड़ रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का मक्का आयात रिकॉर्ड दस लाख टन के स्तर पर पहुंचने की बात कही गई है।