छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित ऐतिहासिक स्थल 'जामड़ी पाट' आज एक बेहद भावुक और ऐतिहासिक पल का गवाह बना। आदिवासी समाज की सालों पुरानी मांग आखिरकार हकीकत में बदल गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सीधे हस्तक्षेप और संवेदनशीलता के बाद समाज के लोगों को जामड़ी पाट के जलकैना (कुंड) में अपनी पारंपरिक पूजा-अर्चना और अनुष्ठान करने की अनुमति मिली, जिसके बाद आज पूरे विधि-विधान के साथ वहां भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ।
बरसों पुरानी मांग पर लगी मुहर
दरअसल, यह मामला लंबे समय से प्रशासन के पास अटका हुआ था। आदिवासी समाज लगातार अपने इस प्रमुख आस्था के केंद्र जामड़ी पाट और वहां मौजूद जलकैना कुंड में पारंपरिक देव-आराधना की अनुमति मांग रहा था। अपनी संस्कृति और हक की लड़ाई लड़ रहे समाज के लोगों के लिए यह एक लंबा इंतजार था। हाल ही में आदिवासी समाज के प्रमुख पदाधिकारियों ने राजधानी में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात की थी। इस अहम बैठक में समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी इस पुरानी मांग को प्रमुखता से मुख्यमंत्री के सामने रखा।
जमीनी स्तर पर दिखा प्रशासन का तालमेल
आदिवासी संस्कृति को सहेजने की बड़ी प्रतिबद्धता
जानकारों का मानना है कि सरकार का यह कदम सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान की अनुमति देने तक सीमित नहीं है। इसे छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की मूल संस्कृति, जल-जंगल-जमीन से जुड़ी उनकी आस्था और पारंपरिक धरोहरों को सुरक्षित रखने की दिशा में राज्य सरकार की एक बड़ी और गंभीर प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।