Government School Exam: बदला पैटर्न, अब सिर्फ रट्टामार प्रणाली नहीं, विद्यार्थियों की समझ और व्यावहारिक ज्ञान की होगी परख
Government School Exam: प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सत्र 2026-27 की छमाही परीक्षाओं का पैटर्न बदलने जा रहा है। कक्षा 3 से 8वीं तक के विद्यार्थियों का मूल्यांकन अब केवल किताबी ज्ञान के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी समझ, विश्लेषण और व्यावहारिक क्षमता के आधार पर किया जाएगा। प्रतिभा पर्व मूल्यांकन 1 दिसंबर से शुरू होगा। वहीं, कक्षा 5वीं और 8वीं के वार्षिक परीक्षा परिणाम में अर्द्धवार्षिक परीक्षा के अंकों का भी वेटेज शामिल किया जाएगा।
Government School Exam: प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इस बार शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलने वाला है। अब तीसरी से आठवीं कक्षा की
छमाही परीक्षाओं में बच्चों की केवल किताबी रटने की क्षमता नहीं परखी जाएगी, बल्कि उनकी वैचारिक समझ, विश्लेषण करने की क्षमता और सीखी गई बातों को असल जिंदगी में लागू करने की दक्षता का आकलन किया जाएगा। इसके लिए राज्य शिक्षा केंद्र ने सत्र 2026-27 के लिए कमर कस ली है और सभी जिला कलेक्टरों को विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।
नया लर्निंग आउटकम्स आधारित पैटर्न
शिक्षा विभाग के नए निर्देशों के मुताबिक, आने वाली परीक्षाएं पूरी तरह से 'लर्निंग आउटकम्स' (सीखने के प्रतिफल) पर आधारित होंगी। खास बात यह है कि पहली बार इस नए पैटर्न पर आधारित एक 'मॉडल प्रश्न बैंक' भी तैयार किया जा रहा है, जिसकी मदद से शिक्षक कक्षाओं में
विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए बेहतर तरीके से तैयार करेंगे। वहीं, छोटी कक्षाओं यानी पहली और दूसरी के नौनिहालों पर परीक्षा का कोई अतिरिक्त दबाव नहीं रहेगा। उनका मूल्यांकन एफएलएन (FLN) आधारित आवधिक मूल्यांकन के जरिए ही किया जाएगा।
कब और कैसे होंगी परीक्षाएं? (मुख्य तारीखें)
सरकारी स्कूलों में तीसरी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए प्रतिभा पर्व मूल्यांकन 1 दिसंबर से शुरू हो रहा है:
कक्षा 3ठी से 5वीं तक: परीक्षाएं 1 से 7 दिसंबर तक, सुबह 10:30 से दोपहर 1:00 बजे तक आयोजित की जाएंगी।
कक्षा 6ठी से 8वीं तक: मूल्यांकन 1 से 8 दिसंबर तक, दोपहर 1:30 से शाम 4:00 बजे तक होगा।
दिलचस्प बात यह है कि इन परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र अक्टूबर माह तक पढ़ाए गए पाठ्यक्रम के आधार पर संबंधित जिलों की डाइट (DIET) द्वारा तैयार किए जाएंगे।
प्रश्नपत्र का स्ट्रक्चर और मार्किंग स्कीम
प्रत्येक विषय का प्रश्नपत्र 60 अंकों का होगा, जिसमें कुल 26 प्रश्न पूछे जाएंगे:
बहुविकल्पीय प्रश्न: 5 प्रश्न (प्रत्येक 1 अंक) = 5 अंक
रिक्त स्थान की पूर्ति: 5 प्रश्न (प्रत्येक 1 अंक) = 5 अंक
अतिलघुउत्तरीय प्रश्न: 6 प्रश्न (प्रत्येक 2 अंक) = 12 अंक
लघुउत्तरीय प्रश्न: 6 प्रश्न (प्रत्येक 3 अंक) = 18 अंक
दीर्घउत्तरीय प्रश्न: 4 प्रश्न (प्रत्येक 5 अंक) = 20 अंक
प्रश्नों की गुणवत्ता और कठिनाई का स्तर:
प्रश्नपत्र में 20% प्रश्न ज्ञान पर आधारित, 50% समझ पर, 20% अनुप्रयोग (Application) और 10% उच्च स्तरीय चिंतन कौशल (HOTS) पर आधारित होंगे।
कठिनाई के स्तर की बात करें तो इसमें 20% प्रश्न आसान, 50% औसत और 30% कठिन श्रेणी के रखे जाएंगे ताकि हर स्तर के बच्चे का सही मूल्यांकन हो सके।
परीक्षा के बाद मनेगा उत्सव: बालसभा का आयोजन
मूल्यांकन प्रक्रिया समाप्त होने के ठीक अगले कार्यदिवस पर स्कूलों में एक अनूठी पहल देखने को मिलेगी—बालसभा का आयोजन। इसे विद्यालय के एक वार्षिक उत्सव की तरह मनाया जाएगा, जिसमें साहित्यिक, सांस्कृतिक और खेलकूद से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां होंगी। इस पूरी बालसभा का संचालन विद्यार्थियों की अपनी 'बाल कैबिनेट' करेगी। इसमें विशेष रूप से अभिभावकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि वे बच्चों की उपलब्धियों को देख सकें और उनके पोर्टफोलियो से रूबरू हो सकें।
निजी स्कूलों के लिए क्या हैं निर्देश?
जहां तक निजी स्कूलों का सवाल है, वहां पांचवीं और आठवीं की अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं राज्य शिक्षा केंद्र की तय समय-सारणी के अनुसार ही होंगी, लेकिन इनके प्रश्नपत्र स्कूल स्तर पर ही अक्टूबर तक के पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किए जाएंगे। अन्य कक्षाओं के लिए निजी स्कूल अपनी सुविधा के अनुसार अर्द्धवार्षिक मूल्यांकन करा सकेंगे। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि कक्षा 5वीं और 8वीं के वार्षिक परीक्षा परिणामों में इस अर्द्धवार्षिक मूल्यांकन के प्राप्तांकों का 20 अंकों का अधिभार (Weightage) शामिल किया जाएगा। जिन विषयों में विद्यार्थी 'ई-ग्रेड' प्राप्त करेंगे, उनके लिए स्कूल विशेष अतिरिक्त कक्षाएं चलाकर उनकी दक्षता में सुधार करेंगे।