पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) को लेकर देशभर में बहस जारी है। कई वाहन मालिकों का कहना है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों के माइलेज पर असर पड़ रहा है और इंजन से जुड़ी परेशानियां भी सामने आ रही हैं। सरकार ने भी माना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से माइलेज में मामूली कमी आ सकती है।
सरकार का कहना है कि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और विदेशी मुद्रा की बचत करना है। इसी बीच सरकार ने संसद में बताया कि एथेनॉल उत्पादन करने वाली कंपनियों को चावल कम कीमत पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
FCI ने 40% सस्ता बेचा चावल
राज्यसभा में मंगलवार को दिए गए लिखित जवाब में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमूबेन जयंतीभाई बांभनिया ने बताया कि फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) ने जून 2025 से जून 2026 के बीच एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को चावल 2,250 से 2,320 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचा।
एथेनॉल प्लांट्स को 63.5 लाख टन चावल
सरकार के मुताबिक, पिछले 12 महीनों में FCI के गोदामों से एथेनॉल उत्पादन करने वाली कंपनियों को करीब 6.35 मिलियन टन यानी 63.5 लाख टन चावल भेजा गया। इस चावल की कुल कीमत करीब 14,596.78 करोड़ रुपये बताई गई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह बिक्री ओपन मार्केट सेल स्कीम (डोमेस्टिक) के तहत तय कीमत पर की गई है।
हरियाणा को मिला सबसे ज्यादा चावल
आंकड़ों के अनुसार, एथेनॉल कंपनियों को चावल मिलने के मामले में हरियाणा सबसे आगे रहा। पिछले एक साल में हरियाणा की एथेनॉल डिस्टिलरीज को FCI से 8,44,141 टन चावल मिला। इसके बाद उत्तर प्रदेश को 8,38,645 टन, पंजाब और हिमाचल प्रदेश को संयुक्त रूप से 6,58,952 टन, पश्चिम बंगाल को 5,84,672 टन और मध्य प्रदेश को 4,32,485 टन चावल उपलब्ध कराया गया।
चावल की कीमतों में बदलाव
सरकार ने एथेनॉल कंपनियों के लिए चावल की कीमत ओपन मार्केट सेल स्कीम के तहत तय की थी। जून से अक्टूबर 2025 तक चावल की कीमत 2,250 रुपये प्रति क्विंटल रखी गई थी। इसके बाद नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026 तक कीमत बढ़ाकर 2,320 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई। वहीं, नवंबर 2026 से जून 2027 तक इसके लिए 2,390 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय की गई है।
FCI लागत और बिक्री में अंतर
FCI के लिए वर्ष 2024-25 में चावल की औसत खरीद लागत 3,719.72 रुपये प्रति क्विंटल थी। वहीं, 2025-26 में यह लागत बढ़कर 3,889.46 रुपये प्रति क्विंटल (संशोधित अनुमान) हो गई। खरीद लागत वह राशि होती है, जिस पर FCI किसानों से चावल खरीदता है। जबकि आर्थिक लागत में खरीद के साथ-साथ भंडारण, परिवहन और वितरण जैसे अन्य खर्च भी शामिल होते हैं।
2026-27 में और चावल बेचने की तैयारी
सरकार की योजना एथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 के लिए FCI के भंडार से करीब 7.2 मिलियन टन चावल बेचने की है। जानकारी के मुताबिक, इसकी बिक्री कीमत लगभग 23,900 रुपये प्रति टन होगी, जबकि इसकी आर्थिक लागत करीब 43,100 रुपये प्रति टन अनुमानित है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस अंतर का असर खाद्य सब्सिडी बिल पर पड़ सकता है, जब तक इसे बजट में अलग से नहीं दिखाया जाता।