कृषि शिक्षक भर्ती में बीएड छूट की आस लगाए अभ्यर्थियों को हाई कोर्ट से झटका, याचिका खारिज
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कृषि शिक्षक भर्ती में B.Ed की अनिवार्य योग्यता से एक बार छूट देने की मांग वाली 65 अभ्यर्थियों की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि भर्ती के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय करना सरकार और संबंधित नियम बनाने वाली संस्था के अधिकार क्षेत्र में है। अदालत अपनी ओर से पात्रता नियमों में छूट नहीं दे सकती। भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 2 सितंबर 2026 निर्धारित है।
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कृषि शिक्षक बनने का सपना देख रहे बीएड रहित अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 65 अभ्यर्थियों की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने मौजूदा भर्ती प्रक्रिया में बीएड की अनिवार्य योग्यता से 'एक बार' की छूट देने की मांग की थी। हाई कोर्ट के जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और भर्ती पात्रता तय करने का सर्वाधिकार सरकार और संबंधित नियम बनाने वाली संस्था का है।
कोर्ट किसी को नहीं दे सकता विशेष रहता
अदालत अपनी ओर से नियमों को शिथिल करके किसी को विशेष राहत नहीं दे सकती। दरअसल, राज्य में कृषि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जिसके तहत 28 जुलाई 2026 को संक्षिप्त विज्ञापन जारी किया गया था और आवेदन की अंतिम तिथि 2 सितंबर 2026 तय की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वर्ष 2019 के नियमों के तहत कृषि शिक्षक के पद के लिए बीएड अनिवार्य नहीं था।
बीएड डिग्री हासिल करने नहीं मिला समय
हालांकि, बाद में अशोकानंद पटेल व अन्य के मामले में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 5 फरवरी 2025 को 2019 वाली छूट को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने 13 फरवरी 2026 को राजपत्र में अधिसूचना जारी कर कृषि शिक्षक पद के लिए बीएड अनिवार्य कर दिया। अभ्यर्थियों की मांग थी कि नई व्यवस्था अचानक लागू होने के कारण उन्हें बीएड की डिग्री हासिल करने का पर्याप्त समय नहीं मिला। इसलिए उन्हें परीक्षा में बैठने की अस्थायी छूट दी जाए और चयन होने पर एक निश्चित समय सीमा के भीतर बीएड पूरा करने की शर्त रखी जाए।
अदालत ने क्यों खारिज की याचिका?
हाई कोर्ट ने याचिका की सुनवाई के दौरान कई कड़े और महत्वपूर्ण बिंदु रेखांकित किए:
डिवीजन बेंच के फैसले का हवाला: कोर्ट ने कहा कि खंडपीठ पहले ही 2019 की छूट को असंवैधानिक करार देकर एनसीटीई (NCTE) के 2014 के मानकों के अनुसार बीएड लागू करने का निर्देश दे चुकी है। ऐसे में फिर से बिना योग्यता के अभ्यर्थियों को अनुमति देना उसी पुराने असंवैधानिक नियम को नए सिरे से लागू करने जैसा होगा।
अदालत का दायरा सीमित: जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने टिप्पणी की कि अनुच्छेद 226 के तहत अदालत केवल यह जांच सकती है कि सरकार का फैसला मनमाना, दुर्भावनापूर्ण या असंवैधानिक तो नहीं है। कोर्ट खुद कोई नया नियम या पात्रता की छूट नहीं गढ़ सकता।
नियमों में छूट देना सरकार का काम: फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि अभ्यर्थियों की व्यक्तिगत सहूलियत के आधार पर भर्ती के अनिवार्य मानदंडों को बदला या ढीला नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट के इस रुख के बाद यह साफ हो गया है कि अब केवल वही अभ्यर्थी इस भर्ती में शामिल हो सकेंगे, जो 2 सितंबर की अंतिम तिथि तक बीएड की निर्धारित योग्यता पूरी करते हैं।