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भारत-चीन सीमा व्यापार की बहाली
भारत-चीन सीमा व्यापार की बहाली
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ऐतिहासिक सिल्क रूट : 6 साल के लंबे इंतजार के बाद 1 अगस्त से भारत-चीन सीमा व्यापार की बहाली

छह साल बाद भारत-चीन के बीच नाथू ला दर्रे से सीमा पार व्यापार फिर शुरू होगा। 1 अगस्त से खुलने वाले इस मार्ग से सिक्किम के करीब 600 व्यापारियों को लाभ मिलेगा और दोनों देशों के संबंधों में सुधार के संकेत मिलेंगे।

कीर्तिमान न्यूज
28 Jul 2026, 09:52 AM
चीन
भारत और चीन के बीच कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐतिहासिक सिल्क रूट के अहम हिस्से 'नाथुला दर्रे' के रास्ते दोनों देशों के बीच सीमा पार व्यापार एक बार फिर शुरू होने जा रहा है। आगामी 1 अगस्त से छह साल से चला आ रहा गतिरोध खत्म हो जाएगा और सीमाओं पर एक बार फिर कारोबारी चहल-पहल देखने को मिलेगी। वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दस्तक देने और सीमावर्ती परिस्थितियों के कारण इस मार्ग से व्यापार पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी। 

व्यापारिक रास्ते को दोबारा खोलने का निर्णय 

अब भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों (SRs) के बीच हुई 24वें दौर की उच्चस्तरीय वार्ता में इस व्यापारिक रास्ते को दोबारा खोलने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है।समुद्र तल से लगभग 14,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित नाथू ला दर्रा केवल एक भौगोलिक रास्ता नहीं है, बल्कि यह प्राचीन विश्व व्यापार की ऐतिहासिक विरासत है।
  • व्यापारिक रास्तों का नेटवर्क: यह कोई एक सीधी सड़क नहीं थी, बल्कि पहाड़ों, रेगिस्तानों और समुद्री रास्तों से जुड़ा एक विशाल नेटवर्क था, जिसने प्राचीन काल में एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच न केवल सामान, बल्कि सभ्यता, विचारों और संस्कृति के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया।

  • सिक्किम का प्राचीन जुड़ाव: सिक्किम से गुजरने वाला यह सिल्क रूट दरअसल तिब्बत के ल्हासा से निकलने वाले मुख्य व्यापारिक मार्ग की एक अहम शाखा है। यह चुम्बी घाटी और नाथू ला दर्रे से गुजरते हुए प्राचीन बंगाल के ऐतिहासिक ताम्रलिप्ति (वर्तमान तामलुक) बंदरगाह तक पहुंचता था।

  • वैश्विक समुद्री व्यापार: ताम्रलिप्ति बंदरगाह से यह मार्ग आगे श्रीलंका, बाली, जावा और सुदूर पूर्वी एशियाई देशों तक फैला हुआ था।

  • मार्ग खुलने का सबसे ज्यादा फायदा सिक्किम के कारोबारियों को 

    गौरतलब है कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद इस रास्ते को पूरी तरह सील कर दिया गया था। चार दशकों से अधिक समय तक बंद रहने के बाद 6 जुलाई 2006 को इसे दोबारा खोला गया था, ताकि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को आर्थिक मजबूती मिल सके। सामान्य दिनों में यह व्यापारिक मार्ग साल में छह महीने (मई से नवंबर) के लिए खोला जाता है। नाथू ला मार्ग के फिर से खुलने की खबर से सबसे ज्यादा राहत सिक्किम के स्थानीय कारोबारी वर्ग को मिली है। इस फैसले से राज्य के लगभग 600 पंजीकृत (Registered) सीमावर्ती व्यापारियों की आजीविका को सीधा फायदा पहुंचेगा, जो 2020 से व्यापार पूरी तरह ठप्प होने के कारण अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे थे।

    किन सामानों की होगी आवाजाही? द्विपक्षीय समझौते के तहत इस मार्ग से केवल तयशुदा और स्वीकृत वस्तुओं का ही व्यापार किया जा सकता है:

    • चीन (तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र) से भारत आने वाला सामान: कच्चा रेशम (Raw Silk), गुणवत्तापूर्ण ऊन, याक के बाल और पारंपरिक मिट्टी के बर्तन।

    • भारत से निर्यात होने वाली वस्तुएं: भारतीय कपड़े, गर्म कंबल, चाय, कॉफी और हस्तशिल्प (Handicrafts) के उत्पाद।

    कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने का ऐलान

    नाथू ला दर्रे से व्यापार का बहाल होना सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं है, बल्कि यह दोनों पड़ोसी देशों के बीच सुधरते कूटनीतिक रिश्तों की ओर भी इशारा करता है। हाल ही में दोनों देशों ने नाथू ला दर्रे के रास्ते प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी फिर से शुरू करने का ऐलान किया था, जिसका विस्तार आगे चलकर लिपुलेख दर्रे तक कर दिया गया है। ऐसे में व्यापार और धार्मिक यात्राओं का यह दौर दोनों देशों के बीच लंबे समय से बनी दूरी को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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