एक दशक में भारत के मोबाइल फोन उद्योग की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। कभी अपनी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर विदेशों से मोबाइल फोन मंगाने वाला भारत अब दुनिया के प्रमुख मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग देशों में शामिल हो गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में इस्तेमाल होने वाले 99 प्रतिशत से अधिक मोबाइल फोन अब भारत में ही बनाए जा रहे हैं। उत्पादन बढ़ने के साथ मोबाइल फोन का निर्यात भी तेजी से बढ़ा है। सरकार अब नई मैन्युफैक्चरिंग योजना के जरिए इस सेक्टर में घरेलू कंपनियों की हिस्सेदारी और सप्लाई चेन को मजबूत करने की तैयारी कर रही है।
भारत में सालाना बने 32 करोड़ मोबाइल फोन
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक पिछले साल भारत में करीब 320 मिलियन यानी 32 करोड़ मोबाइल फोन का निर्माण किया गया। यह आंकड़ा बताता है कि बीते कुछ वर्षों में देश की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता कितनी तेजी से बढ़ी है। भारत अब मोबाइल फोन निर्माण के मामले में दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक देशों में शामिल है। करीब 10 साल पहले स्थिति इससे बिल्कुल अलग थी। उस समय देश में मोबाइल फोन की मांग पूरी करने के लिए आयात पर काफी निर्भरता थी। अब घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ने से यह निर्भरता काफी कम हो गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में इस्तेमाल होने वाले करीब 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन देश में ही तैयार किए जा रहे हैं।
निर्यात में भी मोबाइल फोन ने बनाई मजबूत जगह
मोबाइल फोन उद्योग की सफलता केवल घरेलू उत्पादन तक सीमित नहीं है। निर्यात के मोर्चे पर भी इस सेक्टर ने बड़ी छलांग लगाई है। सरकारी जानकारी के मुताबिक 2025 में स्मार्टफोन भारत से निर्यात होने वाली सबसे बड़ी उत्पाद श्रेणी बन गए। इस दौरान मोबाइल फोन ने डीजल ईंधन और कटे-पॉलिश किए गए हीरों जैसे लंबे समय से प्रमुख रहे निर्यात उत्पादों को भी पीछे छोड़ दिया। इस बदलाव से भारत की पहचान केवल एक बड़े स्मार्टफोन बाजार के रूप में नहीं, बल्कि मोबाइल फोन के प्रमुख उत्पादन और निर्यात केंद्र के तौर पर भी मजबूत हुई है। सरकार का जोर अब देश में केवल फोन असेंबल करने के बजाय ज्यादा से ज्यादा उपकरण और पुर्जों का घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाने पर है।₹62,500 करोड़ की मैन्युफैक्चरिंग योजना
मोबाइल फोन उद्योग को अगला बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 62,500 करोड़ रुपए के बजट वाली मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) की घोषणा की है। इस योजना के जरिए देश में बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता बढ़ाने और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग की सप्लाई चेन को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा। योजना का एक प्रमुख उद्देश्य घरेलू मूल्य संवर्धन यानी DVA को बढ़ाना है। आसान शब्दों में इसका मतलब है कि मोबाइल फोन के ज्यादा से ज्यादा हिस्से और निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाएं भारत में ही हों, ताकि तैयार उत्पाद में घरेलू उद्योग की हिस्सेदारी बढ़ सके। इससे स्थानीय कंपनियों, कंपोनेंट निर्माताओं और दूसरे संबंधित उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
भारतीय मोबाइल ब्रांड्स को भी मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि नई मैन्युफैक्चरिंग योजना से भारतीय स्वामित्व वाले मोबाइल ब्रांड्स को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। अभी भारत में दुनिया की कई बड़ी कंपनियां मोबाइल फोन का उत्पादन कर रही हैं, लेकिन आने वाले वर्षों में घरेलू ब्रांड्स की उत्पादन क्षमता और वैश्विक बाजार में उनकी मौजूदगी बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। अगर मैन्युफैक्चरिंग के साथ मोबाइल कंपोनेंट्स का घरेलू उत्पादन भी तेजी से बढ़ता है, तो भारत की आयात पर निर्भरता और कम हो सकती है। इसके साथ ही रोजगार, निवेश और निर्यात के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। पिछले एक दशक में मोबाइल फोन के आयातक से बड़े निर्माता और निर्यातक बनने तक का भारत का सफर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आए बड़े बदलाव को दिखाता है।