Jhiram Ghati Naxal Attack: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में बुधवार को विशेष एनआईए अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इससे पहले 5 सितंबर को कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद सभी 10 जीवित आरोपियों को दोषी करार दिया था। वहीं, मामले के एक आरोपी की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है। झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को हुआ था। उस समय कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा में आयोजित सभा के बाद वापस लौट रही थी।
कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का काफिला दरभा और तोंगपाल के बीच झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान घात लगाए बैठे नक्सलियों ने काफिले पर हमला कर दिया था। इस हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा, कांग्रेस नेता उदय मुदलियार समेत कई नेताओं, कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी। वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल भी हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिनका बाद में इलाज के दौरान निधन हो गया था। इस हमले में 30 से अधिक लोगों की जान गई थी।
100 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज
मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने की थी। जांच के बाद एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ एक हजार से अधिक पन्नों की चार्जशीट अदालत में पेश की थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई अहम साक्ष्य पेश किए और 100 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद 5 सितंबर को 10 आरोपियों को दोषी घोषित किया था। इसके बाद बुधवार को सजा का ऐलान किया गया।इन 10 आरोपियों को सुनाई गई फांसी की सजा
झीरम घाटी हमले के मामले में जिन आरोपियों को दोषी ठहराया गया है, उनमें:
- महादेव नाग
- प्रोमिला मोड़ियाम
- सुमित्रा पुनेम
- मुक्का मंडावी
- बेंजामी सन्ना
- कवासी जोगा
- चैतु लेकाम
- आयता मड़कम
- कवासी कोसा
- मड़कामी देवा
शामिल हैं।
एनआईए की चार्जशीट में माओवादी संगठन के तत्कालीन शीर्ष नेताओं समेत कई अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया था। अदालत का यह फैसला करीब 13 साल पुराने झीरम घाटी हमले से जुड़े मामले में आया है।

