ग्राम पंचायत बालुद में घटिया निर्माण का मामला सामने आया है। यहां 54 लाख रुपए की लागत से बन रही सीमेंट कंक्रीट सिंचाई नहर मानसून की पहली बारिश में कई जगह से टूट गई। नहर क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों और किसानों ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए जल संसाधन विभाग और ठेकेदार पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
जमीन की सिंचाई के लिए बनाई जा रही थी नहर
यह नहर बालुद के केवरामुंडापारा में उद्वहन सिंचाई योजना के नवीनीकरण के तहत बनाई जा रही है। योजना के जरिए करीब 82 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई और लगभग 150 किसानों को लाभ मिलने का दावा किया गया था। हाल ही में यहां करीब 200 मीटर लंबी सीमेंट कंक्रीट नहर का निर्माण कराया गया था।
बारिश में धंसा हिस्सा, कई जगह आई दरारें
लगातार बारिश के बाद नहर का एक हिस्सा धंस गया, जबकि कई स्थानों पर दरारें भी दिखाई देने लगीं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए थे, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया।कम सीमेंट और वाइब्रेटर नहीं लगाने का आरोप
किसानों ने आरोप लगाया कि कंक्रीट डालते समय वाइब्रेटर मशीन का इस्तेमाल नहीं किया गया, जिससे निर्माण मजबूत नहीं हो पाया। ग्रामीणों का दावा है कि कई जगह निर्धारित मोटाई से कम कंक्रीट डाली गई और सीमेंट की मात्रा भी कम रखी गई। उनका कहना है कि कुछ हिस्सों में कंक्रीट इतनी कमजोर है कि पशुओं के चलने से भी उखड़ रही है।
निर्माण पूरा नहीं, भुगतान भी लंबित
मामले में जल संसाधन विभाग के ईई आरके बेग ने बताया कि नहर का निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है और ठेकेदार को अंतिम भुगतान भी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि भारी बारिश के कारण मिट्टी धंसने से नहर का एक हिस्सा प्रभावित हुआ है।क्षतिग्रस्त हिस्से में बनेगा सीढ़ीनुमा स्ट्रक्चर
ईई ने बताया कि जिस स्थान पर नुकसान हुआ है, वहां सीढ़ीनुमा पक्का स्ट्रक्चर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इससे बारिश और बाढ़ के पानी की निकासी बेहतर तरीके से हो सकेगी और भविष्य में नुकसान की संभावना कम होगी।