Krishna Janmashtami: मठ-मंदिरों में भव्य सजावट, 11 क्विंटल मालपुए के भोग से लेकर थाने में कारागार मंचन तक की खास तैयारियां
Krishna Janmashtami: छत्तीसगढ़ में जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। रायपुर समेत रायगढ़ और बिलासपुर के प्रमुख मंदिरों में विशेष श्रृंगार, अभिषेक, भोग, भजन-कीर्तन और मध्यरात्रि महाआरती के आयोजन होंगे।
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कीर्तिमान न्यूज
04 Sep 2026, 07:54 AM
रायपुर
Krishna Janmashtami: आज भाद्रपद कृष्ण अष्टमी पर पूरे छत्तीसगढ़ में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का पावन पर्व बेहद उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। प्रदेश के प्रमुख शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी और सुगंधित फूलों से सजाया गया है। मध्यरात्रि को भगवान के जन्म के साथ ही महाआरती, महाभिषेक और महाभोग के विशेष आयोजन होंगे।
रायपुर के प्रमुख मंदिरों में भक्ति की लहर
जैतुसाव मठ (पुरानी बस्ती): यहाँ जन्माष्टमी की तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। शाम 4 बजे से भजन संध्या का आयोजन होगा। जन्मोत्सव के अवसर पर ठाकुरजी का दिव्य स्वर्ण श्रृंगार किया जा रहा है। मध्यरात्रि 12 बजे मंत्रोच्चार के साथ आरती होगी। भगवान को 11 क्विंटल मालपुआ और 1 क्विंटल पंजीरी का भव्य भोग चढ़ाया जाएगा, जिसका वितरण अगले दिन (5 सितंबर) शाम 5 बजे से श्रद्धालुओं में होगा।
दूधाधारी मठ: यहाँ जन्मोत्सव का यह महापर्व 4 दिनों तक (7 सितंबर तक) चलेगा। आज सुबह 8 बजे से जारी भजन-कीर्तन के बीच रात 12 बजे जन्म की मुख्य आरती होगी। इस चार दिवसीय आयोजन का समापन 7 सितंबर को एकादशी के दिन होगा।
राधाकृष्ण मंदिर (समता कॉलोनी): कोलकाता के कुशल कारीगरों द्वारा मंदिर और प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया गया है। सुबह 101 लीटर दूध से भगवान के अभिषेक के बाद से ही श्रद्धालु झांकी दर्शन कर रहे हैं। रात 8 बजे से भक्ति कार्यक्रमों के बीच मध्यरात्रि में महाआरती होगी।
156 साल पुराना बांके बिहारी मंदिर (पेठा लाइन, नयापारा): सुबह दुग्धाभिषेक और श्रृंगार दर्शन के बाद दिनभर भजन-कीर्तन का दौर जारी है। रात 12:01 बजे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की मुख्य आरती संपन्न की जाएगी।
इस्कॉन मंदिर (टाटीबंध): यहाँ 3 दिवसीय जन्माष्टमी महा-महोत्सव चल रहा है। कृष्ण बाललीला, भक्ति नृत्य, कथक और पुष्पांजलि जैसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी जा रही हैं। रात 9 बजे महाभिषेक, मध्यरात्रि में छप्पन भोग और रात 12:15 बजे महाआरती का समय तय किया गया है।
गिरिराज मंदिर (बूढ़ापारा): इस मंदिर की खास बात यह है कि यहाँ चारों धामों—बद्रीनाथ, जगन्नाथपुरी, रामेश्वरम् और द्वारका—से विशेष रूप से लाई गई पूजन सामग्री से भगवान गिरिराज की आराधना की जा रही है।
गोपाल मंदिर (सदर बाजार): आज मध्यरात्रि जन्मोत्सव के बाद, कल (5 सितंबर) को यहाँ पारंपरिक नंद महोत्सव की धूम रहेगी। श्रद्धालुओं द्वारा भगवान को पालने में झुलाकर भजनों के साथ खुशियाँ मनाई जाएँगी।
जैतुसाव मठसिटी कोतवाली में जीवंत होगा द्वापर युग का दृश्य
राजधानी रायपुर के सिटी कोतवाली थाने में इस वर्ष भी एक अनूठी परंपरा देखने को मिलेगी। यहाँ कलाकार वसुदेव, देवकी और कारागार के पहरेदारों की वेशभूषा में भगवान कृष्ण के जन्म के प्रसंग का सजीव मंचन करेंगे। रात ठीक 12 बजते ही प्रतीकात्मक रूप से थाने की बत्तियाँ बंद कर दी जाएँगी और जैसे वसुदेवजी नवजात कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना पार ले गए थे, ठीक उसी तर्ज पर यहाँ से जयकारों के बीच ठाकुरजी को टोकरी में लेकर सदर बाजार स्थित गोपाल मंदिर तक ले जाया जाएगा।
रायगढ़ और बिलासपुर में भी उत्सव का माहौल
रायगढ़ के प्रसिद्ध श्याम मंदिर और गौरी शंकर मंदिर में रात 12 बजे मुख्य पूजन होगा। यहाँ सुबह से ही सुंदर और आकर्षक झांकियाँ सजाई गई हैं, जो अगले दो दिनों तक श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रहेंगी। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी हजारों की संख्या में भक्तों का आना शुरू हो गया है। अगले दिन शहर में जगह-जगह विशाल भंडारों का आयोजन भी किया जाएगा। बिलासपुर के प्रमुख मंदिरों में भी मध्यरात्रि अभिषेक और महाप्रसाद वितरण की व्यापक तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं।