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श्री राम मंदिर ट्रस्ट को लीगल नोटिस
श्री राम मंदिर ट्रस्ट को लीगल नोटिस
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लीगल नोटिस : अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को 3 दिन के भीतर देना होगा चंदे का पूरा हिसाब

अयोध्या के भव्य श्री राम मंदिर और उससे जुड़े श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के चंदे व खर्च को लेकर नया विवाद सामने आया है। RJD सांसद सुधाकर सिंह की ओर से ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों—महंत नृत्य गोपाल दास, चंपत राय और स्वामी गोविंद देव गिरि—को कानूनी नोटिस भेजा गया है।

कीर्तिमान न्यूज
18 Jun 2026, 12:48 PM
अयोध्या
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर के चंदे और खर्च को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों को एक कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेजा गया है। यह नोटिस ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, महासचिव चंपत राय और कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज को मिला है। इस नोटिस के सामने आने के बाद से राजनैतिक और धार्मिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है।

तीन दिनों के भीतर देना होगा साल-दर-साल का पूरा ब्योरा

बिहार के बक्सर से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह की ओर से यह नोटिस भेजा गया है। नोटिस में ट्रस्ट से कहा गया है कि उन्हें पिछले पांच सालों यानी वित्तीय वर्ष 2021-22 से लेकर 2025-26 के बीच मिले कुल चंदे और किए गए खर्च का पूरा ब्योरा देना होगा। इसके लिए ट्रस्ट को सिर्फ तीन दिन का समय दिया गया है। मांग की गई है कि ट्रस्ट अपनी ऑडिट की हुई बैलेंस शीट, ऑडिटर की रिपोर्ट, खरीदी गई जमीनों के दस्तावेज, बैंक खातों की जानकारी और विदेशों से मिले चंदे (FCRA) का पूरा हिसाब-किताब सार्वजनिक करे।

जनहित और पारदर्शिता के लिए उठाया कदम

सांसद सुधाकर सिंह के वकील सत्यम सिंह राजपूत ने बताया कि यह नोटिस किसी राजनैतिक फायदे या निजी दुश्मनी के लिए नहीं भेजा गया है, बल्कि यह पूरी तरह जनहित में है। उन्होंने कहा कि देश-विदेश के करोड़ों भक्तों ने राम मंदिर के लिए अपनी गाढ़ी कमाई दान में दी है। ट्रस्ट इस पैसे का मालिक नहीं बल्कि एक रखवाला है। जहां जनता का पैसा लगा हो, वहां पारदर्शिता यानी साफ-सुथरा हिसाब होना कोई एहसान नहीं बल्कि जिम्मेदारी है। सांसद सुधाकर सिंह ने भी कहा कि वे सिर्फ यह चाहते हैं कि भक्तों के पैसे का हिसाब सही तरीके से सामने आए ताकि किसी के मन में कोई शंका न रहे।

कानून के तहत हिसाब देना जरूरी

इस कानूनी नोटिस में इंडियन ट्रस्ट्स एक्ट, इनकम टैक्स एक्ट और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) जैसे कड़े कानूनों का हवाला दिया गया है। ये कानून किसी भी सार्वजनिक धार्मिक संस्था पर सही तरीके से खातों का रख-रखाव करने और मांगे जाने पर जानकारी देने की जिम्मेदारी डालते हैं। नोटिस में कोर्ट के पुराने फैसलों का भी जिक्र है, जिसमें साफ कहा गया था कि धार्मिक संस्थाओं को मिलने वाला चंदा ट्रस्टियों की निजी जागीर नहीं होता। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि अगर तीन दिनों में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो इस मामले को अदालत और उचित कानूनी मंचों पर ले जाया जाएगा।
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