आगामी राजनीतिक चुनौतियों और देश के ताजा घटनाक्रमों के बीच कांग्रेस आलाकमान ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में बुधवार को पार्टी मुख्यालय में एक बेहद अहम और मैराथन बैठक हुई। करीब तीन घंटे तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक में पार्टी के सभी महासचिवों, राज्य प्रभारियों और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्षों ने शिरकत की।
इस बैठक में न केवल मध्य प्रदेश और झारखंड के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों पर चर्चा हुई, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता, NEET और CBSE जैसी परीक्षाओं में गड़बड़ी, कमरतोड़ महंगाई और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर एक ठोस रणनीति तैयार की गई।
एक देश, दो कानून का लगाया आरोप
बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने चुनावी प्रक्रियाओं और सरकारी तंत्र के दुरुपयोग को लेकर केंद्र सरकार पर तीखे हमले किए।
मध्य प्रदेश का मामला: वेणुगोपाल ने बताया कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन बेहद मामूली और तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया गया। उन्होंने दावा किया, "नटराजन के खिलाफ कोई एफआईआर, कोई आपराधिक मामला या चार्जशीट लंबित नहीं थी। सिर्फ अदालत के एक पुराने नोटिस का खुलासा न होने को ढाल बनाकर उनका पर्चा रद्द कर दिया गया, जो पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है।"
झारखंड में दोहरा मापदंड: इसके विपरीत, कांग्रेस ने झारखंड का उदाहरण देते हुए पक्षपात का आरोप लगाया। वेणुगोपाल के अनुसार, वहां बीजेपी समर्थित एक बड़े कॉरपोरेट उम्मीदवार का नामांकन पत्र तमाम विसंगतियों और कथित तौर पर नाम तक सही न होने के बावजूद स्वीकार कर लिया गया। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आखिर विपक्ष और सत्तापक्ष के उम्मीदवारों के लिए अलग-अलग मापदंड क्यों अपनाए जा रहे हैं?
आगामी 2-3 महीनों में देशव्यापी जनआंदोलन की घोषणा
कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह इन मुद्दों को सिर्फ बंद कमरों या बयानों तक सीमित नहीं रखेगी। पार्टी ने अगले दो से तीन महीनों के भीतर राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा जनआंदोलन शुरू करने का एलान किया है।
"जहां भी जनता परेशान है, कांग्रेस वहां खड़ी होगी" यह आंदोलन सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर तक ले जाया जाएगा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जमीन पर उतरकर जनता के हक की लड़ाई लड़ने और स्थानीय मुद्दों को उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
TMC के कांग्रेस में विलय की अफवाहों पर लगा पूर्णविराम
पिछले कुछ दिनों से सियासी गलियारों में पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कांग्रेस में विलय को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। इस बैठक में कांग्रेस ने इन तमाम अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया।
केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की सोनिया गांधी व राहुल गांधी से हुई मुलाकातें INDIA गठबंधन के तहत एक सामान्य और शिष्टाचार भेंट थीं।
विलय की सभी खबरें पूरी तरह निराधार, काल्पनिक और महज अफवाह हैं। गठबंधन के साथी के तौर पर दोनों दल साथ मिलकर काम करते रहेंगे।
NEET, CBSE और महंगाई पर सरकार को घेरने की तैयारी
बैठक में शामिल वरिष्ठ कांग्रेस नेता कुमारी शैलजा ने कहा कि देश का युवा और आम नागरिक इस समय गहरे संकट में है।
युवाओं का मुद्दा: NEET और CBSE जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं में हाल ही में सामने आई विसंगतियों और पेपर लीक के मामलों को लेकर कांग्रेस छात्रों के साथ सड़क से संसद तक खड़ी होगी।
आर्थिक मोर्चे पर घेराव: बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आम जनता की घटती कमाई के मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय की जाएगी। कुमारी शैलजा ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से जनता की आवाज रही है और इस बार यह आवाज और अधिक बुलंद होगी।
खरगे की बैठक का असल राजनीतिक संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा बुलाई गई यह बैठक महज एक संगठनात्मक समीक्षा नहीं थी, बल्कि यह 2026 और उसके बाद होने वाले विधानसभा व आम चुनावों के लिए कांग्रेस का 'एक्शन प्लान' है।
इस बैठक के जरिए कांग्रेस नेतृत्व ने अपने कैडर को तीन स्पष्ट संदेश दिए हैं:
आक्रामक विपक्ष की भूमिका: अब रक्षात्मक होने का समय नहीं है, सरकार को हर मोर्चे पर सीधे चुनौती दी जाएगी।
संविधान और लोकतंत्र की रक्षा: चुनावी प्रक्रियाओं में निष्पक्षता के मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बनाया जाएगा।
गठबंधन का सम्मान, लेकिन जमीन पर अपनी मजबूती: INDIA ब्लॉक के सहयोगियों के साथ तालमेल बिठाते हुए कांग्रेस अपने सांगठनिक आधार को कमजोर नहीं होने देगी।
