Mahasamund Fire: इमलीभाटा में फ्रिज-एसी रिपेयरिंग दुकान में लगी भीषण आग, नगर पालिका की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
Mahasamund Fire: इमलीभाटा वार्ड-10 में AC और फ्रिज रिपेयरिंग दुकान में भीषण आग लग गई। घटना के बाद रहवासी क्षेत्र में जोखिम भरे व्यवसायों के संचालन और नगर पालिका की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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कीर्तिमान रिपोर्टर | नरेंद्र कुमार
13 Sep 2026, 04:24 PM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Mahasamund Fire: जिले के वार्ड नंबर 10 इमलीभाटा में एक फ्रिज और एसी रिपेयरिंग की दुकान में भीषण आग लगने की घटना सामने आई है। इस Mahasamund Fire हादसे ने न केवल स्थानीय लोगों को दहशत में डाल दिया, बल्कि रहवासी इलाके में इस तरह की जोखिम भरी दुकानों के संचालन और नगर पालिका की निगरानी व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। keertiman.com की टीम ने इस पूरी घटना की ग्राउंड रिपोर्टिंग के आधार पर विस्तृत जानकारी जुटाई है।
कैसे लगी आग, क्या रहा कारण
घटना के समय दुकान बंद थी। जिस वक्त आग लगी, उस समय दुकान मालिक मौके पर मौजूद नहीं थे। थोड़ी देर बाद जब वे वहां पहुंचे तो आग की भयावहता देखकर हैरान रह गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग लगने का प्रमुख कारण इलेक्ट्रिक शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, हालांकि दुकानदार का कहना है कि उस समय सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बंद थे। इस विरोधाभास ने इस Mahasamund Fire मामले को और भी संदिग्ध बना दिया है।
रहवासी इलाके में व्यावसायिक जोखिम, उठे सवाल
गौर करने वाली बात यह है कि जिस इलाके में यह दुकान संचालित हो रही थी, वह व्यावसायिक क्षेत्र नहीं बल्कि पूरी तरह रहवासी इलाका है, जहां आसपास कई परिवार निवास करते हैं। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में फ्रिज और एसी रिपेयरिंग जैसी दुकान का संचालन गंभीर सवाल खड़े करता है, क्योंकि इस दुकान में न केवल रिपेयरिंग का काम होता था बल्कि बड़ी मात्रा में कॉम्प्रेसर और ज्वलनशील गैस का स्टॉक भी रखा हुआ था। यही कारण रहा कि आग लगने के बाद लगातार कई धमाके हुए, जिससे आग पर काबू पाना बेहद मुश्किल हो गया।
नगर पालिका की दुविधा और अधिकारियों के बयान
इस Mahasamund Fire प्रकरण में नगर पालिका की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। वार्ड पार्षद के अनुसार दुकान संचालक ने NOC ले रखी थी, यानी नगर पालिका को इस दुकान के संचालन की पूरी जानकारी थी और पालिका ने इसकी अनुमति भी दी थी। वहीं दूसरी ओर, नगर पालिका अध्यक्ष निखिल कांत साहू का कहना है कि कई दुकानें बगैर अनुमति और जानकारी के संचालित होती हैं, और इस मामले में दुकान संचालक पर उचित कार्रवाई की जाएगी। पालिका के दो जिम्मेदार पदाधिकारियों के परस्पर विरोधाभासी बयान इस पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को उजागर करते हैं।
इस घटना ने प्रशासन के सामने दो बेहद अहम सवाल खड़े कर दिए हैं:
पहला सवाल – यह दुकान पिछले 6 वर्षों से संचालित थी और एसी-फ्रिज रिपेयरिंग में ज्वलनशील गैस का इस्तेमाल होता है। ऐसे में रहवासी इलाके में इस तरह की दुकान के संचालन पर पहले प्रतिबंध या कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या नगर पालिका किसी बड़ी दुर्घटना के होने का इंतजार कर रही थी?
दूसरा सवाल – यदि दुकान संचालन की अनुमति वाकई दी गई थी, तो नगर पालिका ने किस आधार पर इतने बड़े जोखिम वाली दुकान को रहवासी क्षेत्र में संचालित करने की मंजूरी दी? क्या NOC जारी करने से पहले इस खतरे की गंभीरता को नजरअंदाज किया गया?
इमलीभाटा में AC-फ्रिज रिपेयरिंग दुकान में लगी आगदमकल की देरी और बिजली के तारों की अव्यवस्था
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग को बुलाया गया, लेकिन शुरुआत में केवल एक दमकल गाड़ी ही मौके पर पहुंच सकी, जो आग पर पूरी तरह काबू नहीं पा सकी। इससे पहले कि दूसरी दमकल गाड़ी पहुंचती, दुकान के अंदर रखे कंप्रेसरों में लगातार धमाके होने लगे, जिससे आग और भीषण होती चली गई।
इस दौरान एक और गंभीर समस्या सामने आई — इलाके की गलियों में जगह-जगह बिजली के तार बेतरतीब ढंग से लटके हुए मिले, जिसकी वजह से दमकल की गाड़ियों को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी दिक्कत हुई। यह अव्यवस्थित विद्युत व्यवस्था न सिर्फ आपातकालीन वाहनों के आवागमन में बाधा बनती है, बल्कि खुद भी किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
नुकसान और स्थानीय लोगों की तत्परता
हालांकि काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन दुकान के अंदर रखा सामान पूरी तरह जलकर राख हो गया। इस Mahasamund Fire हादसे में किसी भी प्रकार की जान-माल की हानि नहीं हुई, जो राहत की बात है। आग बुझाने में आसपास के रहवासियों ने भी अहम भूमिका निभाई। स्थानीय लोगों ने कुएं से पानी निकालकर बाल्टियों की मदद से लगातार आग बुझाने का प्रयास किया, जिसके चलते स्थिति और बिगड़ने से बच गई।
इमलीभाटा में हुआ यह Mahasamund Fire हादसा केवल एक दुर्घटना भर नहीं, बल्कि शहरी नियोजन, प्रशासनिक निगरानी और सुरक्षा मानकों में मौजूद खामियों की ओर इशारा करता है। रहवासी इलाकों में जोखिम भरे व्यवसायों के संचालन को लेकर नगर पालिका को स्पष्ट नीति बनानी होगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं टाली जा सकें। साथ ही अव्यवस्थित बिजली के तारों की समस्या का भी जल्द समाधान जरूरी है, जो आपातकालीन सेवाओं के लिए बड़ी बाधा साबित होते हैं।
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