Mahasamund News: छत्तीसगढ़ के पूर्व संसदीय सचिव और महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार इस दिशा में ठोस उपलब्धियां पेश करने में नाकाम रही है। चंद्राकर ने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देश के विकास के बजाय अस्थिरता बढ़ाने वाले फैसले लिए गए हैं।
विनोद चंद्राकर ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा हो सकता है, जब देश के नागरिकों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो और युवाओं को पर्याप्त रोजगार के अवसर मिलें। उन्होंने सरकारी संस्थानों को निजी हाथों में सौंपने की नीति पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, दीप जलाने, थाली बजाने और रंगोली बनाने जैसे प्रतीकात्मक कार्यक्रमों से विकास का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।
नोटबंदी और कोरोना प्रबंधन को लेकर सरकार पर निशाना
पूर्व विधायक ने नोटबंदी और कोरोना महामारी के दौरान सरकार के फैसलों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी का फैसला पर्याप्त तैयारी के बिना लिया गया, जिससे छोटे कारोबार प्रभावित हुए और बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका पर असर पड़ा। वहीं, कोरोना काल में ऑक्सीजन, दवाइयों और इलाज की कमी के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उठाए सवाल
चंद्राकर ने आरोप लगाया कि देश में सरकार के खिलाफ आवाज उठाने और अपने अधिकारों की मांग करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि रोजगार मांगने, भ्रष्टाचार का विरोध करने, महंगाई पर सवाल उठाने और अपनी बात रखने वालों को जेल भेजे जाने की घटनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं। उनके अनुसार, लोकतंत्र में असहमति और सवाल पूछने की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए।सरकारी कंपनियों के निजीकरण पर जताई चिंता
पूर्व विधायक ने सरकारी कंपनियों में विनिवेश और निजीकरण की नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एयर इंडिया और नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड जैसे संस्थानों में सरकारी हिस्सेदारी निजी हाथों में जा चुकी है। उन्होंने इंडियन मेडिसिंस फार्मास्युटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड की हिस्सेदारी बेचे जाने का भी उल्लेख किया। चंद्राकर के मुताबिक, सरकारी संस्थानों में हिस्सेदारी बेचने की नीति से रोजगार और सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका पर असर पड़ सकता है।
बेरोजगारी, महंगाई और कर्ज को लेकर पूछा सवाल
विनोद चंद्राकर ने बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और बढ़ते कर्ज को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि उसकी विकास योजनाओं का आम नागरिकों के जीवन पर क्या असर पड़ा है। उन्होंने सवाल किया कि यदि लोगों को रोजगार, आर्थिक सुरक्षा और बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, तो 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य किस तरह पूरा होगा।बड़े उद्योगपतियों को लेकर भी सरकार को घेरा
चंद्राकर ने देश की आर्थिक नीतियों और बड़े औद्योगिक घरानों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि नीतियों का लाभ कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों तक सीमित रहने की आशंका है। उन्होंने एलन मस्क का उल्लेख करते हुए दावा किया कि वैश्विक स्तर पर भी भारत की आर्थिक नीतियों और बड़े कारोबारी समूहों के प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

