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महिला खिलाड़ियों की वापसी के लिए गाइडलाइन जारी
महिला खिलाड़ियों की वापसी के लिए गाइडलाइन जारी
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मां बनने के बाद वापसी : ICC का 6R फॉर्मूला महिला क्रिकेटरों के करियर को देगा नई उड़ान

आईसीसी ने महिला क्रिकेटरों के लिए एक ऐतिहासिक पहल करते हुए पोस्ट-प्रेग्नेंसी रिटर्न गाइडलाइन जारी की है। 16 हफ्तों के इस वैज्ञानिक कार्यक्रम में '6R मॉडल' के तहत खिलाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से मैदान पर वापसी के लिए तैयार किया जाएगा। हर खिलाड़ी के लिए एक विशेषज्ञ केस मैनेजर नियुक्त होगा, जो रिकवरी से लेकर मैच फिटनेस तक पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा।

प्रकाशित: 23 Jun 2026, 07:35 AM · अपडेट: 11 Sep 2026, 03:22 AM
खेल डेस्क
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

महिला क्रिकेटरों के लिए अब मां बनना उनके करियर का अंत या लंबा ब्रेक नहीं साबित होगा। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने महिला खिलाड़ियों के हक में एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला लिया है। सोमवार (22 जून) को आईसीसी ने प्रेग्नेंसी के बाद महिला खिलाड़ियों की मैदान पर सुरक्षित और मजबूत वापसी के लिए एक खास 'पोस्ट-प्रेग्नेंसी गाइडलाइन' जारी की है। 16 हफ्तों का यह वैज्ञानिक प्लान यह सुनिश्चित करेगा कि मां बनने के बाद खिलाड़ी शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह फिट होकर दोबारा पिच पर चौके-छक्के लगाने के लिए तैयार हो सकें।

क्या है ICC का '6R' मॉडल?

आईसीसी ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद प्रोफेशनल और सुरक्षित बनाने के लिए '6R' मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल के तहत खिलाड़ियों को अचानक से मैदान पर उतारने के जोखिम से बचाया जाएगा और उन्हें 6 अलग-अलग चरणों से गुजारकर धीरे-धीरे खेल के अनुकूल बनाया जाएगा। इन चरणों में शामिल हैं:

  1. Ready (तैयारी)

  2. Review (समीक्षा)

  3. Restore (पुनर्प्राप्ति)

  4. Recondition (कंडीशनिंग)

  5. Return (वापसी)

  6. Refine (सुधार)

इस योजना का मुख्य उद्देश्य सिर्फ खिलाड़ी की फिजिकल रिकवरी ही नहीं, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य, मेडिकल टेस्ट और मां बनने के बाद बदली हुई जिंदगी व नई जिम्मेदारियों के बीच एक बेहतरीन तालमेल बिठाना है।

हर खिलाड़ी के साथ रहेगा एक 'परछाईं' की तरह मददगार (केस मैनेजर)

इस नई नीति की सबसे बड़ी खूबी यह है कि आईसीसी किसी भी खिलाड़ी को अकेले इस सफर को तय करने नहीं छोड़ेगा। नई गाइडलाइंस के मुताबिक, मैदान पर वापसी की प्रक्रिया से गुजर रही हर महिला क्रिकेटर के लिए एक समर्पित 'केस मैनेजर' नियुक्त किया जाएगा।

खास बात: यह जिम्मेदारी कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि एक्सपर्ट डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट संभालेंगे। यह केस मैनेजर खिलाड़ी की डिलीवरी के बाद से लेकर मैदान पर उनके पहला मैच खेलने तक, रिकवरी के हर छोटे-बड़े पहलू की निगरानी करेगा।

कदम-दर-कदम होगी जांच, फिटनेस साबित होने पर ही मिलेगी हरी झंडी

मां बनने के बाद महिला शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं, इसलिए आईसीसी ने वापसी के नियमों को बेहद कड़ा और सुरक्षित रखा है:

  • शुरुआती फेज: पहले चरण में खिलाड़ी की शारीरिक क्षमता के साथ-साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य का भी बारीकी से आकलन किया जाएगा। इसके बाद ही बेहद हल्के स्तर की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (ताकत बढ़ाने की कसरत) शुरू होगी।

  • 8 हफ्ते बाद दौड़ने की इजाजत: डिलीवरी के करीब 8 हफ्ते बीत जाने और डॉक्टर या फिजियो की हरी झंडी मिलने के बाद ही खिलाड़ी को मैदान पर दौड़ने (रनिंग) की अनुमति मिलेगी।

  • फाइनल क्लीयरेंस: मांसपेशियों और पेल्विक फ्लोर (Pelvic Floor) से जुड़ी हर छोटी-बड़ी समस्या की गहन जांच की जाएगी। जब मेडिकल टीम पूरी तरह आश्वस्त हो जाएगी कि खिलाड़ी का शरीर इंटरनेशनल क्रिकेट का दबाव झेलने के लिए तैयार है, तभी उन्हें मैच खेलने की मंजूरी दी जाएगी।

हमारा नजरिया: आईसीसी का यह कदम महिला क्रिकेट के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। इससे न सिर्फ खिलाड़ियों का करियर लंबा होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ी की महिला एथलीट्स को यह भरोसा मिलेगा कि वे बिना अपने करियर से समझौता किए मातृत्व का सुख ले सकती हैं।

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