उत्तराखंड के चमोली जिले में गुरुवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया। पीपलकोटी क्षेत्र में 440 मेगावाट की विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा घुस जाने से 7 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के वक्त टनल के भीतर कुल 28 श्रमिक काम कर रहे थे। अब तक 22 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है, जिनमें से 11 घायल श्रमिकों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। वहीं, कम से कम 6 मजदूर अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। यह परियोजना टीएचडीसी (THDC) लिमिटेड की है, जहाँ निर्माण का जिम्मा हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (HCC) के पास है।
राहत कार्य में लगे अधिकारी-कर्मचारीकड़ी मशक्कत के बाद मिले शव
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टनल के भीतर पानी का स्तर छाती से ऊपर तक पहुँच गया था। एनडीआरएफ (NDRF) के इंस्पेक्टर अमृत लाल मीणा ने बताया कि सूचना मिलते ही उनकी टीम ने मोर्चे को संभाला। मीणा ने बताया, "सुरंग के भीतर पानी बहुत ज्यादा था। मैं और मेरी टीम के 5 सदस्य पानी के बीच से रास्ता बनाते हुए अंदर दाखिल हुए, जबकि बाकी जवान बाहर से उपकरणों का समन्वय कर रहे थे। हमारे कुछ जवानों के पास अंडरवॉटर ऑपरेशन के विशेष उपकरण थे। चार शव पूरी तरह पानी में डूबे हुए थे और बाहर से नजर नहीं आ रहे थे। हमने कड़ी मशक्कत के बाद उन चारों शवों को बरामद किया।"
हादसे में घायल भूस्खलन से मिट्टी और पानी सुरंग में घुसा
जानकारी के मुताबिक, यह घटना गुरुवार शाम करीब 6:30 बजे घटी। पहाड़ पर भूस्खलन जैसी स्थिति बनने के बाद अचानक भारी मात्रा में मिट्टी, दलदल और पानी सुरंग के अंदर आ गिरा, जिससे काम कर रहे मजदूर वहीं फंस गए। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए बताया कि देर रात तक 18 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया था। सीएम ने कहा कि घायलों को तत्काल गोपेश्वर जिला अस्पताल और पीपलकोटी के स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा, "हमारी पहली प्राथमिकता हर एक जिंदगी को सुरक्षित बाहर निकालना है। गंभीर रूप से घायल 3-4 मजदूरों के बेहतर इलाज के लिए ऋषिकेश एम्स और श्रीनगर बेस अस्पताल में सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें एयरलिफ्ट भी किया जाएगा। मौके पर NDRF, SDRF, सेना, ITBP, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें तैनात हैं।"
बचाव कार्यों का लिया जायजा
जिलाधिकारी गौरव कुमार भी घटना की खबर मिलते ही देर रात खुद मौके पर पहुँचे और राहत अभियानों की कमान संभाली। हादसे की खबर मिलते ही बद्रीनाथ विधानसभा क्षेत्र के विधायक लखपत बुटोला भी मौके पर पहुँचे। उन्होंने बचाव कार्यों का जायजा लिया और अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली। हालाँकि, इस दौरान उन्होंने कंपनी प्रबंधन और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी खड़े किए।
विधायक बुटोला ने कहा, "यह बेहद दुखद घटना है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि पिछले साल भी इस जगह पर ऐसा ही हादसा हुआ था। उसके बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए? अगर इतनी बड़ी लापरवाही बार-बार हो रही है, तो यह एक गंभीर विषय है। इसकी उच्च स्तरीय जाँच होनी चाहिए ताकि दोषियों की जवाबदेही तय की जा सके।"
फिलहाल, सुरंग के अंदर जमा मलबे और पानी को हटाने का काम जारी है ताकि लापता 6 मजदूरों तक जल्द से जल्द पहुँचा जा सके। पूरे इलाके में अफरा-तफरी और चिंता का माहौल बना हुआ है।