छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में अब सरकारी बिजली कनेक्शन प्री-पेड व्यवस्था से संचालित किए जाएंगे। यानी बिजली का इस्तेमाल करने से पहले पर्याप्त बैलेंस रखना होगा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने एक अगस्त से लागू इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पहले चरण में विकासखंड और उससे ऊपर के स्तर के शासकीय कार्यालयों के बिजली कनेक्शन स्मार्ट मीटर के जरिए प्री-पेड बिलिंग व्यवस्था में शामिल किए जाएंगे। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से निचले स्तर के सरकारी कार्यालयों को भी नई व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
अधिकारियों की तय होगी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक नगरीय निकाय को अपने अधीन आने वाले सभी सरकारी बिजली कनेक्शनों की समीक्षा करनी होगी। इन कनेक्शनों के लिए ग्रुप आईडी निर्धारित की जाएगी। प्री-पेड बिलिंग, रिचार्ज, भुगतान और बैलेंस की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी भी तय होगी। नगर निगमों में आयुक्त अथवा उनके निर्देश पर जोन आयुक्त, उपायुक्त या कार्यपालन अभियंता को नोडल अधिकारी बनाया जा सकेगा।
बैलेंस पर रखनी होगी नजर
वहीं नगर पालिका और नगर पंचायतों में मुख्य नगर पालिका अधिकारी यह जिम्मेदारी संभालेंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्री-पेड व्यवस्था लागू होने के बाद पेयजल आपूर्ति, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, स्वच्छता सहित दूसरी आवश्यक सेवाओं की बिजली किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए निकायों को अपने बिजली कनेक्शनों के बैलेंस पर लगातार नजर रखनी होगी। भुगतान, रिचार्ज या किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में नोडल अधिकारी छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के अधिकारियों से समन्वय कर समस्या का समाधान कराएंगे।सेवाओं पर पड़ा असर तो निकाय होगी जिम्मेदार
प्रत्येक निकाय को ग्रुप आईडी, बिजली कनेक्शन, पुराने बकाया, किए गए भुगतान, प्री-पेड रिचार्ज और उपलब्ध बैलेंस का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। इसकी रिपोर्ट हर महीने की पांच तारीख तक राज्य शहरी विकास अभिकरण की एनर्जी ऑडिट शाखा को भेजनी होगी। व्यवस्था की नियमित समीक्षा नगर निगम आयुक्त और मुख्य नगर पालिका अधिकारी करेंगे। विभाग ने जिम्मेदारी भी तय कर दी है। लापरवाही के कारण बिजली आपूर्ति बंद होती है और इसका असर निकाय द्वारा संचालित आवश्यक सेवाओं पर पड़ता है, तो संबंधित नगरीय निकाय को जिम्मेदार माना जाएगा। नगरीय निकायों को पुराने बिजली बिलों के भुगतान के लिए भी व्यवस्था दी गई है।
बकाया बिलों का भुगतान किस्तों में
30 जून 2026 तक लंबित बिजली बिलों की बकाया राशि चार तिमाहियों में समान किस्तों के जरिए चुकानी होगी। भुगतान से पहले निकाय अपने बकाया की राशि का सत्यापन करेंगे। इसके साथ ही आगामी तिमाही में होने वाली अनुमानित बिजली खपत के आधार पर प्री-पेड रिचार्ज के लिए राशि पहले से उपलब्ध रखनी होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बैलेंस खत्म होने से बिजली कनेक्शन बंद न हो और पानी, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज तथा स्वच्छता जैसी जरूरी शहरी सेवाएं निर्बाध रूप से चलती रहें।