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Meta पर अमेरिकी कोर्ट का जुर्माना
Meta पर अमेरिकी कोर्ट का जुर्माना
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Meta को अमेरिका में बड़ा झटका, युवाओं को नुकसान मामले में ₹5,000 करोड़ का जुर्माना

अमेरिका की न्यू मैक्सिको अदालत ने युवाओं की मानसिक सेहत और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मामले में Meta को 567 मिलियन डॉलर (करीब ₹5,000 करोड़) का भुगतान करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जुर्माने की राशि का इस्तेमाल बच्चों के इलाज, जागरूकता अभियान और सुरक्षा उपायों के लिए किया जाएगा।

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प्रकाशित: 07 Aug 2026, 05:00 PM · अपडेट: 13 Sep 2026, 10:34 AM
गैजेट डेस्क
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta को अमेरिका में बच्चों और युवाओं की सुरक्षा से जुड़े मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से युवाओं को हुए नुकसान की भरपाई के लिए कंपनी को 567 मिलियन डॉलर (करीब 5,000 करोड़ रुपए) का भुगतान करने का आदेश दिया है।
यह फैसला बच्चों की मानसिक सेहत, सोशल मीडिया की आदत और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े एक बहुचर्चित मुकदमे के दूसरे चरण में आया है। अदालत के इस आदेश से Meta की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि कंपनी पहले ही इस मामले में जिम्मेदारी को लेकर सवालों के घेरे में रही है।

इलाज और जागरूकता कार्यक्रमों पर खर्च होगी राशि

जज ब्रायन बीडशीड ने अपने आदेश में कहा कि कुल जुर्माने की राशि में से करीब 420 मिलियन डॉलर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी उपचार सेवाओं पर खर्च किए जाएंगे। वहीं, बाकी राशि अगले पांच वर्षों के दौरान जागरूकता अभियान, रोकथाम कार्यक्रम, स्क्रीनिंग सेवाओं और अन्य जरूरी उपायों के लिए इस्तेमाल की जाएगी। अदालत का यह फैसला सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी को लेकर चल रही बहस के बीच आया है। अमेरिका में लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि बच्चों और किशोरों को ऑनलाइन नुकसान से बचाने के लिए टेक कंपनियों को कितनी जवाबदेही निभानी चाहिए।

पहले भी लग चुका है 375 मिलियन डॉलर का जुर्माना 

इस मामले के पहले चरण में जूरी ने Meta को दोषी ठहराते हुए 375 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया था। जूरी का कहना था कि कंपनी ने बच्चों की मानसिक सेहत पर पड़ने वाले प्रभावों को नजरअंदाज किया और प्लेटफॉर्म पर बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले कंटेंट को लेकर पर्याप्त कदम नहीं उठाए। अब अदालत के नए आदेश के बाद Meta पर वित्तीय दबाव और बढ़ गया है। कंपनी को न केवल भारी रकम का भुगतान करना होगा, बल्कि अपनी सुरक्षा नीतियों और मॉडरेशन सिस्टम को लेकर भी सवालों का सामना करना पड़ रहा है।

बच्चों से जुड़े कंटेंट मामले में Meta ने मानी थी गलती 

इस बीच, Meta ने हाल ही में इंस्टाग्राम और फेसबुक पर बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर अपनी चूक स्वीकार की थी। कंपनी के CEO मार्क जुकरबर्ग ने भी माना था कि चाइल्ड सेक्शुअल अब्यूज से जुड़े कंटेंट की पहचान और रोकथाम में कुछ कमियां रही हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि कंपनी इन खामियों को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाएगी और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने पर काम करेगी। Meta के खिलाफ आया यह फैसला सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। दुनियाभर में सरकारें और अदालतें अब बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और डेटा प्राइवेसी को लेकर टेक कंपनियों की भूमिका पर सख्ती दिखा रही हैं।
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