Winter Session: संसद के शीतकालीन सत्र के शुरू होने में अब महज कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन सत्र की तारीख नजदीक आते ही राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुँच गई है। इस बार के सत्र में आम आमदनी या विधेयकों से ज्यादा जिस बात की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह है देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच होने वाली संभावित 'आर-पार की बहस'। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार संसद के दोनों सदनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोक देखने को मिल सकती है।
खुली चुनौती और अमित शाह का पलटवार
इस पूरी सियासी उठापटक की नींव तब पड़ी थी जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक रूप से संसद में बहस की खुली चुनौती दे दी थी। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से इस चुनौती पर सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने इस पर मोर्चा संभाल लिया है। हाल ही में हरियाणा के करनाल में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी के इस बयान पर तीखा पलटवार किया। अमित शाह के उस बयान को सियासी गलियारों में बहुत गौर से डिकोड किया जा रहा है। गृह मंत्री ने दो टूक अंदाज में कहा था कि यदि राहुल गांधी वास्तव में किसी मुद्दे पर गंभीर चर्चा चाहते हैं, तो उन्हें पीएम मोदी को औपचारिक पत्र लिखना चाहिए। उन्होंने यहां तक साफ कर दिया कि सरकार SIR के अलावा अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विशेष सत्र बुलाने से पीछे नहीं हटेगी। जानकारों का मानना है कि अगर अलग से विशेष सत्र नहीं भी बुलाया जाता है, तो आगामी शीतकालीन सत्र इस बहुप्रतीक्षित बहस का गवाह बन सकता है।
शशि थरूर का बड़ा बयान: प्रस्ताव अब भी कायम है
राहुल गांधी द्वारा दी गई बहस की इस चुनौती पर अब कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर का भी बयान सामने आ गया है। थरूर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि राहुल गांधी की ओर से दी गई बहस की पेशकश आज भी पूरी तरह से कायम है। उन्होंने संकेत दिया है कि जैसे ही संसद का सत्र पटल पर आएगा, इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा की जा सकती है।
आखिर क्या था राहुल गांधी का वह बयान?
पूरे विवाद की शुरुआत राहुल गांधी के उस आक्रामक तेवर से हुई थी जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा निशाना साधा था। अपनी एक चुनावी या जनसभा के दौरान राहुल ने तंज कसते हुए कहा था कि चुनौती दिए हुए पूरे 24 घंटे से ज्यादा बीत चुके हैं, लेकिन प्रधानमंत्री की तरफ से अब तक कोई जवाब नहीं आया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि सरकार अक्सर विपक्ष के सवालों से बचने के लिए उन्हें राष्ट्रविरोधी ठहराने की कोशिश करती है। बहरहाल, 25 नवंबर से शुरू होने जा रहे शीतकालीन सत्र से पहले राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या संसद के फ्लोर पर देश की जनता को दोनों दिग्गजों के बीच वह बहुप्रतीक्षित सीधी बहस देखने को मिलती है या नहीं।












