कुदरत का कहर : नारायणपुर के कादेर गांव में बाढ़ ने सबकुछ किया तबाह, 16 परिवार बेघर, दो मासूमों की जान गई
नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ स्थित कादेर गांव में बाढ़ से 16 परिवार बेघर हो गए हैं। घर, मवेशी और जरूरी सामान बह गए हैं, जबकि दो मासूम बच्चियों की मौत हो चुकी है। ग्रामीणों ने राहत और प्रशासनिक सहायता नहीं मिलने का आरोप लगाया है।
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कीर्तिमान न्यूज
02 Aug 2026, 10:04 AM
नारायणपुर
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में अबूझमाड़ का दुर्गम इलाका इस समय कुदरत के भीषण प्रकोप से जूझ रहा है। लगातार हो रही भारी बारिश और नदियों के उफान ने जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित मेटानार ग्राम पंचायत के आश्रित गांव कादेर में तबाही मचा दी है। बाढ़ के सैलाब ने देखते ही देखते पूरे गांव को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे 16 परिवार पूरी तरह बेघर हो चुके हैं। पीड़ित ग्रामीणों की आपबीती सुनकर किसी का भी कलेजा कांप उठे। बाढ़ का पानी इतनी तेजी से गांव में दाखिल हुआ कि लोगों को संभालने तक का मौका नहीं मिला।
सरकार से मिली सुविधा भी बाढ़ में बह गई
घर के बर्तन, कपड़े, जीवनभर की जमा-पूंजी और जरूरी कागजात ताश के पत्तों की तरह बह गए। इतना ही नहीं, ग्रामीणों के पालतू मवेशी भी इस भयानक सैलाब की भेंट चढ़ गए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे इस वक्त पाई-पाई को मोहताज हैं और पड़ोसियों व परिचितों से मांगकर किसी तरह पेट पाल रहे हैं। अबूझमाड़ के इस अंदरूनी इलाके में केंद्र सरकार की 'पीएम जनमन योजना' के तहत ग्रामीणों को जो बुनियादी मदद मिली थी, वह भी इस आपदा की बलि चढ़ गई।
बाढ़ से हुई भारी तबाहीभविष्य को लेकर चिंता
आशियाना छिन जाने और सरकारी मदद के बह जाने के बाद अब ग्रामीणों के सामने अपनी जिंदगी को दोबारा ढर्रे पर लाने का बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। भविष्य को लेकर वे गहरे सदमे और अनिश्चितता में हैं।
आपदा के इतने दिन बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के रवैये को लेकर भारी नाराजगी है। पीड़ितों का आरोप है कि:
बाढ़ के बाद से अब तक कोई भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उनका हाल जानने गांव तक नहीं पहुंचा है।
उन्हें फिलहाल किसी भी प्रकार की आपातकालीन राहत सामग्री नहीं मिली है।
पड़ोसी गांव में कुछ ग्रामीणों को अधिकारियों द्वारा बुलाया तो गया है, लेकिन किस काम से बुलाया गया है, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी उन्हें नहीं दी गई है।
बाढ़ बहा ले गई दो मासूमों जिंदगीयां
बाढ़ का यह दर्द केवल सामान के नुकसान तक सीमित नहीं है। बीते 30 जुलाई को अबूझमाड़ क्षेत्र में हुई मूसलाधार बारिश ने दो परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। उफनते नाले को पार करने के दौरान दो मासूम बच्चियां पानी के तेज बहाव में बह गईं, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई। बारिश के कारण क्षेत्र के संपर्क मार्ग पूरी तरह से कट चुके हैं और कई पुल-पुलिया पानी में डूब गए हैं, जिससे राहत बचाव कार्य में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।