Navratri Digital Fasting: नवरात्र के पावन दिनों में श्रद्धालु अक्सर शरीर और आत्मा की शुद्धि के लिए नौ दिनों तक उपवास रखते हैं। कोई केवल फलाहार पर रहता है तो कोई एक समय का भोजन करता है। लेकिन इस बार स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने एक अनोखा सुझाव दिया है—'डिजिटल फास्टिंग' यानी मोबाइल और स्क्रीन से दूरी का व्रत। आजकल सुबह आंख खुलने से लेकर रात को सोने तक हमारी आंखें मोबाइल स्क्रीन पर ही टिकी रहती हैं। बड़े हों या बच्चे, हर कोई वर्चुअल दुनिया में इतना उलझा है कि आसपास मौजूद अपनों के लिए समय ही नहीं बचता। यही वजह है कि डॉक्टरों का मानना है कि इस नवरात्र तन और मन को सेहतमंद बनाने के लिए मोबाइल के अति-उपयोग पर भी लगाम लगाना जरूरी है।
सेहत पर स्क्रीन का भारी असर
मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार स्क्रीन के सामने रहने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
- मानसिक तनाव और नींद की कमी: मनोचिकित्सकों का कहना है कि सोशल मीडिया और मोबाइल पर लगातार सक्रिय रहने से लोगों में चिड़चिड़ापन, बेचैनी और ध्यान भटकने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। देर रात तक स्क्रीन देखने से नींद का चक्र बिगड़ जाता है।
- आंखों पर दबाव: नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार, घंटों स्क्रीन पर टकटकी लगाने से आंखों में सूखापन, जलन, सिरदर्द और धुंधलापन महसूस हो सकता है। इससे बचने के लिए डॉक्टरों ने '20-20-20 नियम' अपनाने की सलाह दी है—यानी हर 20 मिनट के इस्तेमाल के बाद 20 सेकंड के लिए कम से कम 20 फीट दूर देखें।
- शारीरिक दर्द: एक ही स्थिति में बैठकर लगातार फोन चलाने से शारीरिक सक्रियता कम हो जाती है, जिससे गर्दन, कंधे और पीठ में दर्द की शिकायत आम हो गई है।
बच्चों पर बढ़ता प्रभाव और अभिभावकों की जिम्मेदारी
शिक्षकों और शिक्षाविदों के अनुसार, बच्चों का अत्यधिक समय मोबाइल पर बिताना उनकी पढ़ाई, खेलकूद और सामाजिक विकास को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में यह जरूरी है कि अभिभावक खुद मोबाइल का सीमित उपयोग करें और बच्चों के सामने एक बेहतर उदाहरण रखें। नवरात्र के दौरान बच्चों को स्क्रीन से हटाकर धार्मिक आयोजनों, किताबें पढ़ने, चित्रकारी या मैदानी खेलों की तरफ प्रेरित किया जा सकता है। इसके अलावा, भोजन करते समय और पढ़ाई के दौरान पूरे परिवार के लिए 'नो फोन' का नियम लागू किया जा सकता है।इस नवरात्र कैसे करें डिजिटल फास्टिंग ?
डिजिटल फास्टिंग का मतलब यह नहीं है कि आप जरूरी काम बंद कर दें, बल्कि इसका मकसद बेवजह के मनोरंजन और सोशल मीडिया से दूरी बनाना है:
- समय सीमा तय करें: दिन में कुछ घंटे तय करें जब आप फोन को पूरी तरह दूर रख दें।
- परिवार को दें वक्त: खाली समय का उपयोग पूजा-पाठ, ध्यान, योग या परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत में करें।
- सोने से पहले दूरी: रात में सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल फोन को अपने पास से हटा दें। इस नवरात्र भक्ति और फलाहार के साथ-साथ डिजिटल फास्टिंग को अपनाकर मानसिक सुकून और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को बेहतर बनाया जा सकता है।







