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छत्तीसगढ़ स्कूल प्रार्थना सभा
छत्तीसगढ़ स्कूल प्रार्थना सभा
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नया नियम : अब स्कूलों में सुबह राष्ट्रगान और शाम को राज्यगीत, शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश

छत्तीसगढ़ में 16 जून 2026 से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राज्यगीत, मंत्र पाठ और सांस्कृतिक गतिविधियों को अनिवार्य कर दिया है। सुबह प्रार्थना सभा, दोपहर में भोजन मंत्र और छुट्टी के समय राज्यगीत का सामूहिक गायन कराया जाएगा।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 13 Jun 2026, 11:44 AM · अपडेट: 03 Oct 2026, 02:59 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ में 16 जून 2026 से नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत होने जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी और निजी विद्यालयों के लिए विस्तृत दैनिक गतिविधि शेड्यूल जारी किया है। महानदी भवन से जारी आदेश के अनुसार अब प्रदेश के सभी विद्यालयों में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और राज्यगीत के साथ विभिन्न सांस्कृतिक, नैतिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों का नियमित आयोजन अनिवार्य होगा। विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू कराने के निर्देश दिए हैं।

शिक्षा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत विद्यालयीन गतिविधियों को तीन अलग-अलग सत्रों में विभाजित किया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में अनुशासन, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना का विकास करना है। सभी विद्यालयों को निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार गतिविधियों का संचालन सुनिश्चित करना होगा।

सुबह की प्रार्थना सभा में राष्ट्रगान

स्कूल प्रारंभ होने के साथ ही प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी। इस दौरान राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र का सामूहिक गायन कराया जाएगा। इसके साथ ही महापुरुषों, स्वतंत्रता सेनानियों तथा प्रेरणादायक व्यक्तित्वों की जीवनी का वाचन भी किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को देश के इतिहास और आदर्शों से परिचित कराया जा सके। मध्याह्न भोजन अथवा भोजनावकाश के दौरान छात्र-छात्राएं भोजन मंत्र का सामूहिक पाठ करेंगे। विभाग का मानना है कि इससे बच्चों में भारतीय संस्कृति, अनुशासन और सकारात्मक जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। विद्यालय की छुट्टी के समय विद्यार्थियों द्वारा राज्यगीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का सामूहिक गायन किया जाएगा। शिक्षा विभाग का कहना है कि इससे बच्चों में राज्य की सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान और सामाजिक समरसता की भावना विकसित होगी।

राष्ट्रप्रेम और अनुशासन को मिलेगा बढ़ावा

विभाग के अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना है। नियमित सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे विद्यालयों का औचक निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि निर्धारित गतिविधियों का नियमित और प्रभावी संचालन हो रहा है। निरीक्षण के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन और प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

शाला प्रवेश उत्सव की तैयारियां पूरी

प्रदेशभर में 16 जून से स्कूल खुलने के साथ ‘शाला प्रवेश उत्सव 2026’ का आयोजन भी किया जाएगा। विभाग ने सभी शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा पाठ्यपुस्तकों के वितरण, समय-सारिणी की उपलब्धता, विद्यालय परिसर की साफ-सफाई, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। नए शैक्षणिक सत्र में लागू किए जा रहे इन निर्देशों को विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ नैतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विभाग को उम्मीद है कि इससे विद्यालयों का वातावरण अधिक अनुशासित, प्रेरणादायक और मूल्यपरक बनेगा।
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