Newcastle University News: रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी इन दिनों अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर सुर्खियों में हैं। ब्रिटेन की प्रतिष्ठित न्यूकैसल यूनिवर्सिटी ने उन्हें सस्टेनेबिलिटी (टिकाऊ विकास) के क्षेत्र में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ नियुक्त किया है। हालांकि, यह नियुक्ति सामने आने के बाद इसे लेकर कई लोगों ने सवाल भी उठाए हैं।
न्यूकैसल यूनिवर्सिटी द्वारा दिया गया प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस पद पारंपरिक शोध या अकादमिक प्रोफेसर की भूमिका से अलग होता है। यह पद आमतौर पर उन लोगों को दिया जाता है, जिनके पास किसी विशेष क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव और पेशेवर योगदान होता है। ऐसे पद अक्सर सीमित अवधि के लिए दिए जाते हैं, ताकि संबंधित क्षेत्र के अनुभवी लोग छात्रों और शोधकर्ताओं के साथ अपना अनुभव साझा कर सकें।
यूनिवर्सिटी ने अनंत अंबानी की नियुक्ति पर क्या कहा
न्यूकैसल यूनिवर्सिटी ने 14 सितंबर को जारी बयान में बताया कि अनंत अंबानी को सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए यह जिम्मेदारी दी गई है। यूनिवर्सिटी के अनुसार, अनंत अंबानी की पहल ‘वंतारा’ वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता (Biodiversity) और पशु कल्याण जैसे क्षेत्रों में काम कर रही है। विश्वविद्यालय ने कहा कि वंतारा में किए जा रहे प्रयास उसके संरक्षण और पर्यावरण से जुड़े शोध कार्यों के उद्देश्यों से मेल खाते हैं।
वंतारा और ग्रीन एनर्जी पहल का दिया गया हवाला
यूनिवर्सिटी ने अपने बयान में कहा कि अनंत अंबानी को यह सम्मान वंतारा के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में योगदान के लिए दिया गया है। इसके अलावा, रिलायंस इंडस्ट्रीज को ग्रीन एनर्जी और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका को भी इस नियुक्ति का आधार बताया गया है।
नियुक्ति पर विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
अनंत अंबानी की नियुक्ति को लेकर कुछ पर्यावरण विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने आपत्ति जताई है। भारतीय इतिहासकार और पर्यावरण विषयों पर लिखने वाले रामचंद्र गुहा ने इसे हैरान करने वाला फैसला बताया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और संरक्षण के क्षेत्र में ऐसे कई लोग हैं, जो इस तरह के सम्मान के लिए अधिक उपयुक्त हो सकते हैं।सोशल मीडिया पर भी उठी आलोचना
ससेक्स यूनिवर्सिटी से जुड़े इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज की शोधकर्ता लाइला मेहता ने सोशल मीडिया पर न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में इस तरह की नियुक्तियां गंभीर चर्चा का विषय हैं और विश्वविद्यालय को इस पर विचार करना चाहिए।
वाइल्डलाइफ संरक्षण को लेकर भी हुई बहस
वन्यजीव व्यापार की जांच और संरक्षण से जुड़े शोधकर्ता भुवन मंगलौर ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या यह फैसला उचित है। उन्होंने वंतारा से जुड़े काम और उसके संरक्षण मॉडल को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं।वंतारा को लेकर पर्यावरणविदों की अलग-अलग राय
वन्यजीव संरक्षण कार्यकर्ता प्रेरणा सिंह बिंद्रा ने भी वंतारा को संरक्षण केंद्र बताए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण का उद्देश्य जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रखना होना चाहिए। उनका कहना है कि यदि जानवरों को एक सीमित स्थान पर रखा जाता है, तो इसे लेकर संरक्षण की परिभाषा पर बहस हो सकती है।
नियुक्ति के बाद शुरू हुई नई बहस
अनंत अंबानी की इस नियुक्ति ने एक बार फिर यह चर्चा तेज कर दी है कि पर्यावरण और संरक्षण के क्षेत्र में सम्मान देने के लिए किन मानकों को आधार बनाया जाना चाहिए। जहां यूनिवर्सिटी ने इसे उनके योगदान की मान्यता बताया है, वहीं कुछ विशेषज्ञों ने इस फैसले पर अपनी अलग राय रखी है।

