शरीर में किसी भी हिस्से में गांठ महसूस होना लोगों के मन में डर पैदा कर देता है। कई बार लोग इसे तुरंत कैंसर से जोड़ लेते हैं, जबकि हर गांठ कैंसर नहीं होती। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे सामान्य समस्या मानकर लंबे समय तक जांच नहीं कराते, जो बाद में परेशानी बढ़ा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में बनने वाली अधिकांश गांठें सामान्य (Benign) होती हैं और उनका कैंसर से कोई सीधा संबंध नहीं होता। ये गांठें फैट जमा होने, त्वचा के नीचे तरल पदार्थ इकट्ठा होने, संक्रमण, चोट या अन्य सामान्य कारणों से भी बन सकती हैं। हालांकि, अगर कोई गांठ लगातार बनी हुई है, उसका आकार बदल रहा है या उसके साथ अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी हो जाता है। समय पर जांच कराने से यह पता लगाया जा सकता है कि गांठ सामान्य है या किसी गंभीर बीमारी का संकेत दे रही है। शुरुआती पहचान से कई स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज आसान हो जाता है।
क्या कारण हो सकते हैं
शरीर में गांठ बनने के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। हर गांठ किसी बड़ी बीमारी का संकेत नहीं होती। कई बार यह शरीर की सामान्य प्रक्रिया या छोटी स्वास्थ्य समस्या के कारण भी बन सकती है। त्वचा के नीचे फैट कोशिकाओं के बढ़ने से लिपोमा (Lipoma) नाम की गांठ बन सकती है। यह आमतौर पर मुलायम होती है और छूने पर आसानी से हिल जाती है। इसमें अधिकतर दर्द नहीं होता और यह खतरनाक नहीं मानी जाती।
सामान्य गांठ की पहचान
- जो धीरे-धीरे बढ़ती है।
- छूने पर आसानी से अपनी जगह से हिल जाती है।
- मुलायम या रबड़ जैसी महसूस होती है।
- लंबे समय तक आकार में ज्यादा बदलाव नहीं होता।
- इसके साथ दर्द, बुखार या अन्य गंभीर लक्षण नहीं होते।
ऐसी गांठें अक्सर सामान्य होती हैं, लेकिन फिर भी यदि कोई नई गांठ दिखाई दे तो उसकी निगरानी करना जरूरी है।
कौन-सी गांठ सामान्य होती है
कभी-कभी चोट लगने के बाद अंदर रक्त जमा होने से भी गांठ जैसी स्थिति बन सकती है। हार्मोनल बदलाव, सूजन या कुछ मामलों में ट्यूमर भी गांठ बनने का कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल गांठ महसूस होने से किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं है। हर गांठ का आकार, बनावट और बढ़ने का तरीका अलग होता है। डॉक्टर जांच के दौरान इन्हीं बातों को देखकर यह तय करते हैं कि गांठ सामान्य है या आगे जांच की जरूरत है।
कठोर हो और अपनी जगह से न हिले
अगर गांठ छूने पर बहुत सख्त महसूस होती है और त्वचा या अंदर के ऊतकों से चिपकी हुई लगती है, तो इसकी जांच जरूरी हो जाती है। सामान्य गांठें अक्सर नरम होती हैं और हल्के दबाव से हिल सकती हैं, जबकि कठोर और स्थिर गांठों को डॉक्टर अधिक गंभीरता से देखते हैं। गांठ के ऊपर की त्वचा में लालिमा आना, रंग बदलना, घाव बनना या किसी तरह का तरल निकलना चिंता का विषय हो सकता है। ऐसे बदलाव संक्रमण या शरीर के अंदर चल रही किसी गंभीर प्रक्रिया की ओर इशारा कर सकते हैं। इसलिए त्वचा में किसी भी असामान्य परिवर्तन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।तुरंत दिखाएं डॉक्टर को
कुछ गांठें ऐसी होती हैं जिनमें समय रहते जांच कराना बेहद जरूरी होता है। खासकर जब गांठ के व्यवहार में तेजी से बदलाव दिखाई दे। यदि कोई गांठ कुछ दिनों या हफ्तों में तेजी से बड़ी होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तेजी से बढ़ती गांठ संक्रमण, सूजन या किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर शारीरिक जांच के साथ जरूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड, स्कैन या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं।