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Mythological story behind Onam
Mythological story behind Onam
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Onam: महाबली ने दिया वचन, विष्णु ने दिया वरदान, जाने ऐसे शुरू हुई ओणम की परंपरा

Onam: ओणम 2026 का त्योहार राजा महाबली और भगवान विष्णु के वामन अवतार से जुड़ी पौराणिक कथा के लिए खास माना जाता है। मान्यता है कि वामन अवतार ने तीन पग भूमि मांगकर महाबली को पाताल लोक भेजा था। महाबली की प्रजा के प्रति प्रेम और समर्पण से प्रसन्न होकर विष्णु ने उन्हें हर साल धरती पर लौटकर अपनी प्रजा से मिलने का वरदान दिया।

कीर्तिमान डेस्क | कमलेश साहू
26 Aug 2026, 05:26 PM
नई दिल्ली
Onam: ओणम दक्षिण भारत, खासकर केरल में मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है। इसे फसल, समृद्धि और खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है। इसके साथ भगवान विष्णु के वामन अवतार और असुरराज महाबली की पौराणिक कथा भी जुड़ी है। मान्यता है कि ओणम के दौरान राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने हर साल धरती पर आते हैं। लेकिन सवाल उठता है कि जब भगवान विष्णु ने वामन रूप में उन्हें पाताल लोक भेजा था, तो फिर उन्हें वापस आने का अवसर क्यों दिया गया ?

कौन थे राजा महाबली ? 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाबली असुर वंश के शक्तिशाली राजा थे। हालांकि उनका संबंध असुर कुल से था, लेकिन अपनी प्रजा के बीच उनकी छवि एक दयालु, न्यायप्रिय और उदार शासक की थी। कहा जाता है कि उनके शासन में लोग खुशहाल थे और किसी के साथ भेदभाव नहीं होता था। महाबली की लोकप्रियता और बढ़ती शक्ति से देवता चिंतित हो गए। इसी दौरान महाबली ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया। कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने इसी यज्ञ में वामन अवतार धारण कर एक छोटे ब्राह्मण के रूप में प्रवेश किया। 

वामन ने मांगी तीन पग भूमि 

यज्ञ स्थल पर पहुंचकर वामन ने महाबली से केवल तीन पग भूमि दान में मांगी। महाबली ने बिना किसी संकोच के उनकी मांग स्वीकार कर ली। इसके बाद वामन ने अपना विराट रूप धारण किया। पहले पग में उन्होंने पूरी पृथ्वी और दूसरे पग में आकाश को नाप लिया। अब तीसरे पग के लिए कोई जगह बाकी नहीं बची थी। तब महाबली ने अपना सिर भगवान के सामने झुका दिया और कहा कि तीसरा पग उनके सिर पर रखा जाए। महाबली के इस समर्पण और वचन निभाने की भावना से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। इसके बाद तीसरा पग उनके सिर पर रखकर उन्हें पाताल लोक भेज दिया गया।

महाबली को क्यों मिला धरती पर लौटने का वरदान ? 

कथा के अनुसार महाबली ने भगवान विष्णु से अपनी प्रजा से मिलने की इच्छा जताई। वह अपने राज्य और लोगों से बेहद प्रेम करते थे और उनसे दूर नहीं रहना चाहते थे। महाबली की दानशीलता, वचनबद्धता और प्रजा के प्रति उनके प्रेम को देखते हुए भगवान विष्णु ने उन्हें विशेष वरदान दिया। मान्यता है कि महाबली को वर्ष में एक बार अपनी प्रजा के बीच धरती पर आने की अनुमति मिली। इसी विश्वास को ओणम से जोड़कर देखा जाता है। केरल में माना जाता है कि ओणम के दौरान राजा महाबली अपनी प्रजा का हाल जानने और उनसे मिलने आते हैं।

ओणम पर महाबली के स्वागत की परंपरा 
महाबली के स्वागत की मान्यता के कारण ओणम के दौरान घरों की विशेष साफ-सफाई की जाती है। लोग घर के आंगन में फूलों से पुक्कलम यानी रंगोली जैसी सजावट करते हैं। इस मौके पर पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं और परिवार के लोग मिलकर त्योहार मनाते हैं। ओणम केवल एक धार्मिक कथा तक सीमित नहीं है। यह प्रकृति, नई फसल, समृद्धि, परिवार और सामुदायिक एकता से जुड़ा उत्सव भी है। महाबली की कहानी इस त्योहार को एक भावनात्मक आधार देती है, जिसमें एक राजा और उसकी प्रजा के बीच प्रेम और अपनापन प्रमुख संदेश के रूप में सामने आता है।

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