भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार इस बार बेहद खास रहने वाला है। सनातन परंपरा में राखी का यह पर्व केवल एक धागा बांधने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भाइयों द्वारा बहनों की रक्षा के संकल्प और बहनों द्वारा भाइयों की लंबी उम्र की प्रार्थना का पवित्र दिन है। इस साल रक्षाबंधन पर एक ऐसा दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है, जो कई दशकों में पहली बार देखने को मिल रहा है।
रक्षाबंधन का मुख्य पर्व 28 को ही
पंडित शशांक शर्मा के अनुसार, पंचांग के हिसाब से इस बार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 8:17 बजे से शुरू होगी और 28 अगस्त को सुबह 9:32 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के नियम का पालन करते हुए रक्षाबंधन का मुख्य पर्व 28 अगस्त 2026 को ही मनाया जाएगा।
ग्रह-नक्षत्रों का अद्भुत संयोग
इस बार की राखी इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि एक साथ कई दुर्लभ योगों का मिलन हो रहा है।
प्रमुख शुभ योग: इस दिन महालक्ष्मी योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत योग, सुकर्मा योग और सौभाग्य योग का अद्भुत संगम बन रहा है।
ग्रहों की स्थिति: शुक्रवार के दिन पूर्णिमा पड़ने के साथ-साथ कुंभ राशि का चंद्रमा और शतभिषा नक्षत्र रहेगा।
किसके लिए खास: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहों का यह विशेष तालमेल कृषि और आर्थिक उन्नति के लिए बेहद फलदायी साबित होगा।
28 को भद्रा या ग्रहण का साया नहीं
अक्सर रक्षाबंधन पर भद्रा का साया बहनों के लिए समय की पाबंदी ले आता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। भद्रा का प्रभाव पर्व से एक दिन पहले यानी 27 अगस्त की रात में ही खत्म हो जाएगा। 28 अगस्त को पूरे दिन किसी भद्रा या ग्रहण का साया नहीं रहेगा। इसका मतलब यह है कि बहनें बिना किसी शुभ-अशुभ के संकोच के, पूरे दिन अपनी सुविधा अनुसार भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकेंगी।