Pitru Paksha Rituals: हिंदू परंपरा में पितृ पक्ष का समय पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का सबसे पवित्र जरिया माना गया है। साल के इन 15 दिनों में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति, तृप्ति और मोक्ष के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्मकांड करते हैं। मान्यता है कि यदि इन दिनों में विधि-विधान और सच्ची श्रद्धा के साथ कार्य किए जाएं, तो पितरों का आशीर्वाद पूरे परिवार पर बना रहता है और जीवन की कई बाधाएं दूर होती हैं।
सूर्य देव के जरिए पितरों तक पहुंचता है तर्पण
अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित के अनुसार, पितृ पक्ष में किए जाने वाले धार्मिक कार्यों का उद्देश्य केवल परंपरा निभाना नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों को नमन करना है। जब किसी व्यक्ति का देहावसान होता है, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उन्हें पितृ रूप में याद किया जाता है। उन्होंने बताया कि पितृ पक्ष के अनुष्ठानों में सूर्य देव की भूमिका बेहद खास होती है। शास्त्रों में सूर्य देव को पितरों तक अर्पण और तर्पण पहुंचाने का मुख्य माध्यम माना गया है। जब हम सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं या उनकी साक्षी में दान-पुण्य करते हैं, तो वह अर्पण सीधे भगवान विष्णु और पितरों तक पहुंचता है। इसलिए इन 15 दिनों में सूर्य उपासना के साथ-साथ जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और उपयोगी सामग्री देना बेहद कल्याणकारी माना जाता है।
राशि के अनुसार करें वस्तुओं का दान
- मेष राशि: लाल रंग के कपड़े, लाल फल या मसूर की दाल दान करें।
- वृषभ राशि: पीले रंग की वस्तुएं, फल या अनाज का दान करना शुभ रहेगा।
- मिथुन राशि: हरी सब्जियां, हरा कपड़ा या मूंग की दाल दान करें।
- कर्क राशि: सफेद वस्त्र, दूध, चावल या किसी भूखे को भोजन कराएं।
- सिंह राशि: गुड़, गेहूं और जरूरतमंदों को भोजन का दान करें।
- कन्या राशि: हरी वस्तुएं, हरा अनाज या दैनिक उपयोग का सामान दान करें।
- तुला राशि: सफेद रंग के कपड़े या सफेद मिठाई/खाद्य पदार्थ दान करें।
- वृश्चिक राशि: लाल वस्त्र, मसूर की दाल या जरूरतमंदों को भोजन दें।
- धनु राशि: चने की दाल, हल्दी, पीले फल या पीले वस्त्र का दान करें।
- मकर राशि: काले तिल, काले वस्त्र या किसी गरीब को जूते/भोजन दान करें।
- कुंभ राशि: तिल, कंबल या शीत निवारक वस्तुओं का दान लाभप्रद होगा।
- मीन राशि: पीले वस्त्र, चने की दाल या धार्मिक पुस्तकें/सामग्री दान करें।
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि दान में सबसे बड़ा भाव श्रद्धा का होता है। अपनी क्षमता अनुसार किसी भी जरूरतमंद की सेवा करना ही पितरों की सच्ची तृप्ति का मार्ग है।

