RBI survey: भारत के आईटी सेक्टर ने एक बार फिर मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश के सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात में सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के वार्षिक सर्वेक्षण के मुताबिक, इस अवधि में भारत का सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात बढ़कर 221.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया। आरबीआई के कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और आईटी-इनेबल्ड सर्विसेज (ITeS) एक्सपोर्ट सर्वे में देश की 7,569 सॉफ्टवेयर निर्यात कंपनियों को शामिल किया गया था। इनमें से 2,363 कंपनियों ने अपनी जानकारी उपलब्ध कराई। इन कंपनियों का कुल सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात में करीब 89 प्रतिशत योगदान रहा।
सर्वे के अनुसार, भारत के कुल सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात में बीपीओ (Business Process Outsourcing) सेवाओं की हिस्सेदारी दो-तिहाई से अधिक रही। आईटी-इनेबल्ड सर्विसेज (ITeS) के निर्यात में बीपीओ सेवाएं सबसे प्रमुख क्षेत्र बनी हुई हैं।
विदेशी बाजारों में भारत की पकड़ मजबूत
भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार बना रहा। कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 54.1 प्रतिशत रही। वहीं यूरोप का योगदान 31.8 प्रतिशत दर्ज किया गया। यूरोपीय देशों में ब्रिटेन की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही, जो कुल सॉफ्टवेयर निर्यात का 15.4 प्रतिशत है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, भारत की सॉफ्टवेयर सेवाओं की डिलीवरी मुख्य रूप से ऑफ-साइट मॉडल के जरिए हुई। कुल निर्यात में ऑफ-साइट सेवाओं की हिस्सेदारी 91.7 प्रतिशत रही। अगर विदेशी वाणिज्यिक उपस्थिति के माध्यम से दी जाने वाली सेवाओं को भी शामिल किया जाए, तो 2025-26 में भारत का कुल सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात 239.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।विदेशी सहायक कंपनियों का कारोबार भी बढ़ा
आरबीआई ने बताया कि भारतीय कंपनियों की विदेशों में स्थित सहायक कंपनियों का स्थानीय सॉफ्टवेयर कारोबार भी तेजी से बढ़ा है। 2025-26 में यह कारोबार बढ़कर 17.9 अरब डॉलर हो गया, जबकि एक साल पहले यह 13.9 अरब डॉलर था। अमेरिका और ब्रिटेन इस क्षेत्र में भी प्रमुख बाजार बने हुए हैं। भारत का आईटी और सॉफ्टवेयर सेवा क्षेत्र वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। निर्यात में लगातार बढ़ोतरी देश की डिजिटल सेवाओं और तकनीकी क्षमता की बढ़ती मांग को दर्शाती है।
