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टिकट न मिलने पर भी देना होगा 8 लाख हर्जाना
टिकट न मिलने पर भी देना होगा 8 लाख हर्जाना
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रेलवे दुर्घटना मुआवजा : टिकट न मिलने पर भी देना होगा 8 लाख हर्जाना, सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सर्वोच्च न्यायालय ने रेलवे दुर्घटना मुआवजा नियम पर बड़ा फैसला दिया है। टिकट गुम होने पर भी पीड़ित परिवार को 8 लाख रुपए मिलेंगे।

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प्रकाशित: 18 Jul 2026, 11:36 AM · अपडेट: 22 Jul 2026, 07:48 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने रेलवे के नियमों में बदलाव को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने रेलवे के नियमों में इस्तेमाल होने वाले सेकेंड क्लास पैसेंजर शब्द पर गहरी आपत्ति जताई। इसके बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि श्रेणी का संबंध केवल कोच से होना चाहिए। किसी भी यात्री की श्रेणी को उसके खर्च से तय नहीं किया जा सकता है।

दस साल पुराने हादसे में मिलेगा 8 लाख का मुआवजा

यह मामला नवंबर 2015 का है जब मध्य प्रदेश के निवासी चंद्रकांत ठक्कर रायपुर से अहमदाबाद जा रहे थे। यात्रा के दौरान वह अचानक ट्रेन से नीचे गिर गए और उनकी दुखद मौत हो गई। हादसे के बाद उनका पूरा सामान गायब हो गया था। इसलिए उनका यात्रा टिकट भी पुलिस को बरामद नहीं हो सका। नतीजतन रेलवे ट्रिब्यूनल और उच्च न्यायालय ने परिवार को मुआवजा देने से साफ इनकार कर दिया था। लेकिन अब सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों पुराने फैसलों को पूरी तरह से पलट दिया है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है। सरकार को 4 सप्ताह के भीतर पीड़ित परिवार को 8 लाख रुपए देने होंगे।

बिना टिकट मिलने पर भी वैध यात्री का दर्जा रहेगा कायम

अदालत ने कहा कि रेलवे दुर्घटना मुआवजा एक बहुत ही कल्याणकारी कानून माना जाता है। सिर्फ टिकट गायब होने से किसी का वैध दर्जा खत्म नहीं होता है। दावेदार अपने प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर हक का दावा पेश कर सकता है। इसके अलावा रेलवे सुरक्षा को लेकर यात्रियों को भी अपनी यात्रा के दौरान सतर्क रहना होगा। चलती गाड़ी में चढ़ना या दरवाजे पर लटकना बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। यही वजह है कि कोर्ट ने रेलवे प्रशासन को भी ट्रेनों में भीड़ प्रबंधन सुधारने को कहा है। विभाग को सुरक्षा बढ़ाने के लिए अपने खाली पड़े पदों पर स्टाफ बढ़ाना चाहिए।

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