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The dilapidated Sinodha-Patewa road, riddled with water-filled potholes
The dilapidated Sinodha-Patewa road, riddled with water-filled potholes
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Road Potholes: सिनोधा-पटेवा मार्ग बना हादसों का सबब, जर्जर सड़क पर पानी और कीचड़ का कब्जा, राहगीर परेशान

Road Potholes: सिनोधा-पटेवा संपर्क मार्ग पर गड्ढों, जलभराव और कीचड़ से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने तत्काल मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 26 Aug 2026, 08:45 AM · अपडेट: 11 Oct 2026, 11:01 PM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Road Potholes: सिनोधा-पटेवा संपर्क मार्ग इन दिनों बदहाली के दौर से गुजर रहा है। निर्माणाधीन सड़क पर जगह-जगह उपजे बड़े-बड़े गड्ढे और उनमें भरा बारिश का पानी राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बन चुका है। आलम यह है कि गड्ढों की गहराई का सही अंदाजा न होने के कारण रोज गाड़ियां हिचकोले खा रही हैं और दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। यह रास्ता न केवल सिनोधा और पटेवा के बीच का मुख्य संपर्क मार्ग है, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के किसानों, कर्मचारियों, व्यापारियों और आम लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा है। 
गड्ढों  में तब्दील हुआ रोड 

सड़क इतनी बदहाल फिर भी अधिकारी मौन 

इसके अलावा विश्वप्रसिद्ध पर्यटन स्थल सिरपुर, बारनवापारा अभयारण्य और धार्मिक स्थल तुरतुरिया जाने वाले श्रद्धालु व पर्यटक भी इसी रूट का इस्तेमाल करते हैं। इसके बावजूद लोक निर्माण विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों की खामोशी समझ से परे है। खराब सड़क का सबसे बुरा असर स्कूली बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों पर पड़ रहा है। सड़क पर बिखरी गिट्टी और फिसलन भरे कीचड़ के बीच रोज बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। 

सड़क पर पर्याप्त लाइट की व्यवस्था नहीं 

हाल ही में इस बदहाल सड़क ने एक बड़े हादसे को न्योता दिया, जब दो बच्चों के साथ बाइक से जा रही एक महिला गहरे गड्ढे में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई। रात के समय स्थिति और भी जानलेवा हो जाती है। सड़क पर न तो पर्याप्त लाइट की व्यवस्था है और न ही कहीं दुर्घटना से बचाने के लिए चेतावनी संकेतक (वार्निंग बोर्ड) या बैरिकेड्स लगाए गए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क का पक्का निर्माण होने में वक्त लग सकता है, लेकिन तब तक आवागमन को सुगम बनाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। 

ग्रामीणों की मुख्य मांगें

  • गड्ढों की भराई: सभी जानलेवा गड्ढों को तत्काल मलबे या गिट्टी से समतल किया जाए।

  • जल निकासी: सड़क पर जमा पानी को निकालने के लिए अस्थाई नालियों का प्रबंध हो।

  • सुरक्षा उपाय: दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में संकेतक और रात में चमकने वाले रेडियम बैरिकेड्स लगाए जाएं।

आंदोलन की चेतावनी

क्षेत्रीय लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि शासन-प्रशासन ने जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। समस्या का समाधान न होने की स्थिति में ग्रामीण जनप्रतिनिधियों का घेराव करने और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष उग्र प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।

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