Adivasi Samaj: छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज ने राज्य सरकार से आदिम जाति विकास विभाग का नाम पूर्ववत रखने की मांग की है। समाज के प्रदेश संयुक्त सचिव मनोहर ठाकुर ने कहा कि विभाग का नाम आदिवासी समाज की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक परंपराओं, सामाजिक अस्मिता और भावनात्मक सम्मान से जुड़ा है। उन्होंने सरकार से नाम परिवर्तन के निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
मंत्रिपरिषद के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग
ठाकुर ने बताया कि 11 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में विभाग का नाम बदलकर ‘जनजातीय विकास विभाग’ करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर सरकार को आदिवासी समाज की भावनाओं और सुझावों को गंभीरता से सुनना चाहिए।
आदिवासी संस्कृति और पहचान से जुड़ा है विषय
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपराओं, रीति-रिवाजों और विशिष्ट सामाजिक जीवन से है। ऐसे में समाज से जुड़े महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेते समय संबंधित समुदाय के प्रतिनिधियों के विचारों और भावनाओं को महत्व दिया जाना चाहिए।
शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की चुनौतियों पर भी ध्यान देने की जरूरत
ठाकुर ने कहा कि आदिवासी समाज आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, भूमि एवं वनाधिकार तथा बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। सरकार को इन समस्याओं के समाधान और समाज के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही, समाज से जुड़े नीतिगत फैसलों से पहले सामाजिक संगठनों और प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित करना चाहिए।समाज की भावनाओं का सम्मान करने का आग्रह
छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज ने मांग की है कि आदिम जाति विकास विभाग का नाम पूर्ववत रखा जाए और नाम परिवर्तन के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए। ठाकुर ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आग्रह किया कि आदिवासी समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस संबंध में सकारात्मक पहल करें।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान, सांस्कृतिक विरासत और सम्मान की रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। सरकार को समाज की मांग पर संवेदनशीलता से विचार करते हुए संबंधित प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर उचित निर्णय लेना चाहिए।






