Shri Ram Smriti Upvan : 108 पौधों से शुरू हुआ ‘श्रीराम स्मृति उपवन’ अब 700 से अधिक वृक्षों का घना परिसर
Shri Ram Smriti Upvan: आरंग विकासखंड के ग्राम बीरबिरा में पथरीली जमीन पर 2017 में 108 पौधों से शुरू हुआ ‘श्रीराम स्मृति उपवन’ आज 700 से अधिक पेड़ों से हरा-भरा हो चुका है। गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं के श्रमदान, नियमित देखभाल और जनसहयोग से यह उपवन पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन गया है।
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कीर्तिमान न्यूज
29 Aug 2026, 06:29 PM
आरंग
मोहन दास मानिकपुरी -
Shri Ram Smriti Upvan: कभी पत्थरों और चट्टानों से भरी जमीन पर पेड़ उगाना आसान नहीं था। लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति और लगातार मेहनत ने इस मुश्किल को भी आसान कर दिया। आरंग विकासखंड के ग्राम बीरबिरा में महानदी मुख्य नहर के किनारे गायत्री प्रज्ञा पीठ चेतना केंद्र के पास विकसित ‘श्रीराम स्मृति उपवन’ आज 700 से अधिक पेड़ों से सजा हुआ है।
2017 में शुरू हुई थी पहल
इस उपवन को वर्ष 2017 में शांतिकुंज हरिद्वार के निर्देश पर परम पूज्य आचार्य श्रीराम शर्मा की स्मृति में विकसित करने का संकल्प लिया गया था। शुरुआत के दौरान सबसे बड़ी चुनौती जमीन की कठोरता थी। पौधे लगाने के लिए गड्ढे खोदने पर मिट्टी की जगह पत्थर और गिट्टी निकलती थी। इसके बावजूद गायत्री परिवार की युवा इकाई के कार्यकर्ताओं ने प्रयास जारी रखा। श्रमदान के जरिए पहले चरण में 108 गड्ढे तैयार किए गए और इनमें पौधारोपण कर उपवन की नींव रखी गई।
‘एक व्यक्ति–एक वृक्ष’ की जिम्मेदारी
पौधों को मवेशियों से बचाने के लिए पूरे क्षेत्र में तार फेंसिंग की गई। इसके साथ ही अभियान को केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रखा गया। प्रत्येक कार्यकर्ता को एक पौधे की जिम्मेदारी दी गई, ताकि उसकी नियमित देखभाल हो सके। समय पर पानी, खाद और सुरक्षा मिलने से पौधे धीरे-धीरे पेड़ों का रूप लेते गए। लगातार देखभाल और लोगों के सहयोग से उपवन का विस्तार भी होता रहा।
अब 700 से ज्यादा पेड़ों से गुलजार है उपवन
108 पौधों से शुरू हुआ यह अभियान अब 700 से अधिक छायादार और फलदार वृक्षों तक पहुंच चुका है। उपवन में नीम, गुलमोहर, जामुन, सीताफल, आम, बरगद और पीपल जैसी कई प्रजातियों के पेड़ मौजूद हैं। आज यह स्थान केवल आचार्य श्रीराम शर्मा की स्मृति से जुड़ा उपवन नहीं रह गया है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए गए सामूहिक प्रयास का उदाहरण बन चुका है। खुशियों को प्रकृति से जोड़ रहे ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने भी इस पहल को अपनाया है। जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और परिजनों की स्मृति जैसे अवसरों पर लोग यहां पौधारोपण कर रहे हैं। इस तरह निजी खुशियों और यादों को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने की परंपरा भी विकसित हो रही है।
युवाओं की मेहनत ने बदली तस्वीर
इस पूरे अभियान को जमीन पर उतारने में गायत्री परिवार जिला युवा प्रकोष्ठ के सक्रिय सदस्य जितेंद्र साहू (कुकरा) और खोमन साहू (लखौली) की विशेष भूमिका रही है। युवाओं के श्रमदान, नियमित देखभाल और पर्यावरण के प्रति समर्पण से तैयार हुआ यह उपवन आज यह संदेश दे रहा है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और सामूहिक प्रयास से पथरीली जमीन पर भी हरियाली उगाई जा सकती है।