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शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी की प्रतीकात्मक तस्वीर
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी की प्रतीकात्मक तस्वीर
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संभला शेयर बाजार: सेंसेक्स और निफ्टी सपाट स्तर पर बंद

भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट देखने को मिली, लेकिन बाद में बाजार ने रिकवरी की। सेंसेक्स और निफ्टी दिन के अंत तक लगभग सपाट स्तर पर कारोबार करते नजर आए। निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी हुई है।

कीर्तिमान न्यूज
26 May 2026, 03:21 PM
मुंबई
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भारतीय शेयर बाजार में आज जबरदस्त हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। लाल निशान के साथ सुस्त शुरुआत करने वाले बाजार ने दिन चढ़ने के साथ ही पासा पलट दिया। शुरुआती बिकवाली के दबाव को मात देते हुए निवेशकों ने निचले स्तरों पर चौके-छक्के लगाए, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक अपने नुकसान की भरपाई कर सपाट (फ्लैट) स्तर पर आ गए।

बाजार के इस यू-टर्न ने साबित कर दिया है कि भले ही वैश्विक हवाएं विपरीत हों, घरेलू मोर्चे पर खरीदारों का दम बरकरार है।

उतार-चढ़ाव के बीच रिकवरी

शुरुआती कारोबार में बीएसई (BSE) सेंसेक्स और एनएसई (NSE) निफ्टी दोनों ही लाल निशान में गोता लगा रहे थे। मुनाफावसूली के डर से निवेशक सहमे हुए थे, लेकिन जैसे ही बाजार निचले सपोर्ट लेवल पर पहुंचा, चुनिंदा हैवीवेट शेयरों में वैल्यू बाइंग (सस्ते में खरीदारी) शुरू हो गई।

  • रिकवरी का कारण: बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यह रिकवरी अचानक नहीं आई है। निवेशक फिलहाल यूएस फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों के फैसले और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर नजर गड़ाए हुए हैं। जैसे ही ऊपरी स्तरों से दबाव कम हुआ, बाजार ने वापस ऊपर का रुख कर लिया।

सेक्टरवार प्रदर्शन: किसने दिया सहारा, किसने डुबोई लुटिया?

आज के कारोबार की सबसे खास बात सेक्टर्स का बदला हुआ मिजाज रही। बाजार को संभालने और गिराने में इन सेक्टर्स की भूमिका कुछ इस तरह रही:

मजबूत सेक्टर्स (तेजी)दबाव वाले सेक्टर्स (मंदी)
बैंकिंग व फाइनेंशियल: पीएसयू और प्राइवेट बैंकों ने बाजार को बूस्टर डोज दिया।मेटल (धातु): वैश्विक मांग में सुस्ती के चलते मुनाफावसूली हावी रही।
आईटी (IT): दिग्गज टेक शेयरों में निचले स्तरों से अच्छी लिफ्टिंग देखी गई।ऊर्जा (Energy): कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों के कारण दबाव में दिखे।
ऑटो (Auto): घरेलू मांग के मजबूत आंकड़ों के दम पर रफ्तार बनी रही।कमोडिटीज: मिले-जुले वैश्विक संकेतों से निवेशक दूर रहे।

FIIs का एक्शन और ग्लोबल ट्रिगर्स

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, घरेलू बाजार की इस चाल के पीछे दो सबसे बड़े फैक्टर्स काम कर रहे हैं:

  1. विदेशी निवेशकों (FII) का मूड: विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार होती बिकवाली और खरीदारी की लुका-छिपी ने बाजार को वोलेटाइल (अस्थिर) बना रखा है।

  2. क्रूड ऑयल और डॉलर: कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उतार-चढ़ाव और अमेरिकी डॉलर इंडेक्स की मजबूती के कारण भारतीय बाजारों में पूरी तरह से तेजी नहीं आ पा रही है।

विशेषज्ञ की राय: "बाजार अभी एक दायरे में फंसा हुआ है। जब तक अमेरिकी बाजारों से कोई स्पष्ट दिशा नहीं मिलती, तब तक भारतीय बाजारों में इसी तरह का 'कंसॉलिडेशन' (ठहराव और उतार-चढ़ाव) देखने को मिल सकता है।"

निवेशकों के लिए अब आगे क्या? 

रिटेल निवेशकों के लिए मौजूदा बाजार किसी परीक्षा से कम नहीं है। विश्लेषकों ने इस माहौल में सीधे तौर पर 'वेट एंड वॉच' (देखो और इंतजार करो) की रणनीति अपनाने की सलाह दी है:

  • क्वालिटी पर ध्यान दें: उतार-चढ़ाव वाले इस दौर में केवल मजबूत फंडामेंटल्स और अच्छी अर्निंग विजिबिलिटी वाली कंपनियों (लार्जकैप) में ही पैसा लगाएं।

  • लंबी अवधि का नजरिया: शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग या पैनिक में आकर शेयर बेचने से बचें। आने वाले दिनों में देश के आर्थिक आंकड़े (GDP, महंगाई दर) बाजार को नई दिशा देंगे, इसलिए लंबी अवधि के लिए निवेशित रहें।

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