Strait of Hormuz : समुद्री बारूदी सुरंगें क्या हैं और कैसे करती हैं हमला? जानिए पूरी प्रोसेस
Strait of Hormuz: होर्मुज़ स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगों को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है। ईरान ने अमेरिका के माइंस हटाने के दावे को खारिज किया है। समुद्री बारूदी सुरंगें जहाजों और पनडुब्बियों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। इन्हें ढूंढना और हटाना भी बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।
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कीर्तिमान डेस्क | कमलेश साहू
26 Aug 2026, 03:39 PM
अमेरिका
Strait of Hormuz: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर दावा किया कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से सभी माइंस (बारूदी सुरंगें) हटा ली गई हैं। हालाँकि, ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने अमेरिकी दावों को सिरे से ख़ारिज करते हुए इसे महज़ राजनीतिक दुष्प्रचार करार दिया।
समंदर की गहराइयों में छिपे 'अदृश्य शिकारी'
समुद्री बारूदी सुरंगें या 'सी माइंस' पानी के भीतर तैनात किए जाने वाले ऐसे विस्फोटक उपकरण हैं, जिन्हें जहाजों और पनडुब्बियों को नष्ट करने या उनकी आवाजाही रोकने के लिए डिज़ाइन किया जाता है। सैन्य रणनीति में इनका उपयोग किसी विशिष्ट समुद्री मार्ग को सील करने या दुश्मन के जहाजों को आगे बढ़ने से रोकने (Sea Denial Strategy) के लिए किया जाता है। सुरक्षा विशेषज्ञ राहुल बेदी के अनुसार, आधुनिक समुद्री माइंस बेहद चालाक और स्वतः चालित (Autonomous) होती हैं। इन्हें 'इंटेलिजेंट माइंस' भी कहा जाता है क्योंकि ये किसी साधारण मालवाहक जहाज़, विशाल तेल टैंकर या लड़ाकू युद्धपोत के बीच आसानी से अंतर पहचान सकती हैं। समुद्री बारूदी सुरंग
14वीं सदी से अब तक: सी माइंस का इतिहास
14वीं सदी (चीन): दुनिया में पहली बार समुद्री माइंस का रिकॉर्डेड इस्तेमाल चीन ने समुद्री डाकुओं (Pirates) के जहाजों को डुबोने के लिए किया था।
अमेरिकी क्रांति: इस दौर में बारूद से भरे लकड़ी के ड्रमों को पानी में तैराया जाता था, जो जहाजों से टकराते ही धमाका कर देते थे।
वैश्विक युद्ध: पहले और दूसरे विश्वयुद्ध के अलावा कोरियाई युद्ध, फ़ॉकलैंड संघर्ष और फ़ारस की खाड़ी के युद्ध (Gulf War) में सी माइंस ने निर्णायक भूमिका निभाई थी।
इन्हें हटाना क्यों है बेहद मुश्किल और जोखिम भरा ?
एंकर माइंस: ये समंदर की तलहटी से जंजीरों द्वारा जुड़ी होती हैं और पानी की सतह के ठीक नीचे तैरती रहती हैं। बॉटम माइंस: ये सीधे समंदर के तल में बैठ जाती हैं और ऊपर से गुज़रने वाले जहाज़ के इंजन के कंपन, पानी के दबाव में बदलाव या चुंबकीय तरंगों (Magnetic Signature) से एक्टिव होती हैं।
स्मार्ट मैकेनिज्म: कई आधुनिक माइंस तब तक विस्फोट नहीं करतीं जब तक कि उनके ऊपर से 2 या 3 जहाज़ सुरक्षित न गुज़र जाएं। यानी पहली माइनस्वीपर बोट को गुज़रने देकर ये पीछे आने वाले मुख्य युद्धपोत को अपना निशाना बनाती हैं।