Strait of Hormuz: लहरों में फिर भड़का बारूद, अमेरिका ने ईरान के रॉकेट लॉन्चर उड़ाए
Strait of Hormuz: जलडमरूमध्य के पास लारक द्वीप पर अमेरिका ने ईरान के दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिका ने इसे समुद्री बारूदी सुरंगों की संभावित तैनाती रोकने की कार्रवाई बताया, जबकि ईरान ने हमले की निंदा करते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। इस घटनाक्रम से खाड़ी क्षेत्र में तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है।
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कीर्तिमान न्यूज
31 Aug 2026, 09:12 AM
तेहरान
Strait of Hormuz: पश्चिम एशिया के बेहद संवेदनशील इलाके 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में पिछले एक महीने से पसरा सन्नाटा रविवार को बारूद के धमाकों से टूट गया। अमेरिकी वायुसेना ने लारक द्वीप पर स्थित ईरानी सैन्य ठिकानों पर अचानक सटीक मिसाइल हमले कर दिए। इस कार्रवाई के बाद से पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल एक बार फिर काले होने लगे हैं। ईरान ने इसे सीधा हमला करार देते हुए अमेरिका को इसका अंजाम भुगतने की खुली चुनौती दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स के मुताबिक, खुफिया निगरानी में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की संदिग्ध हलचल दर्ज की गई थी।
ईरान के दो रॉकेट लॉन्चर तबाह
ईरानी बल होर्मुज स्ट्रेट के मुख्य समुद्री व्यापारिक रास्ते में बारूदी सुरंगें (सी-माइन्स) बिछाने और रॉकेट तैनात करने की फिराक में थे। खतरे की आहट मिलते ही अमेरिकी सेना ने तुरंत एक्शन लिया और लारक द्वीप पर मौजूद ईरान के दो रॉकेट लॉन्चरों को पूरी तरह से तबाह कर दिया। सैन्य जानकारों के मुताबिक, जुलाई के आखिर में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सैन्य अभियानों पर लगाई गई रोक के बाद से ईरान की सरजमीं पर यह पहला बड़ा अमेरिकी स्ट्राइक है।
इजराइली ठिकानों पर मिसाइलों की बौछारहमलावर देश को देंगे ऐसी सजा लंबे समय तक रखेंगे याद
इधर, तेहरान और ईरानी सरकारी मीडिया ने लारक द्वीप के पास भीषण विस्फोटों की पुष्टि की है। IRGC ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि इस अमेरिकी दुस्साहस में उसके कई सैनिक मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं। ईरानी सैन्य कमान ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि 'हमलावर देश' को उसकी इस हिमाकत की ऐसी सजा दी जाएगी, जिसे वह लंबे समय तक याद रखेगा। भौगोलिक और सामरिक दृष्टि से लारक द्वीप बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह ईरान के प्रमुख बंदरगाह 'बंदर अब्बास' के ठीक सामने स्थित है और यही से पूरी दुनिया के कच्चे तेल की आवाजाही का सबसे बड़ा रास्ता गुजरता है।
ईरान लंबे समय से इस क्षेत्र से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों पर कड़ी निगरानी रख रहा है।
पश्चिमी देशों का आरोप है कि ईरानी नौसेना यहां से गुजरने वाले कमर्शियल शिप्स से 20 लाख डॉलर (लगभग 1.5 मिलियन पाउंड) तक की अवैध फीस वसूल रही है।
इजराइली ठिकानों पर मिसाइलों की बौछार
अमेरिका और ईरान के बीच यह ताजा टकराव अचानक नहीं हुआ है। इसकी नींव इसी साल 28 फरवरी को पड़ी थी, जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरानी शहरों पर हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य अड्डों और इजराइली ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन की बौछार कर दी थी। तनाव को रोकने के लिए 18 जून को दोनों देशों के बीच 60 दिनों का एक अस्थायी युद्धविराम समझौता (MoU) हुआ था, ताकि किसी स्थायी हल पर पहुंचा जा सके।
कूटनीति के सारे रास्ते बंद
हालांकि, 17 अगस्त को इस समझौते की मियाद बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। अब लारक द्वीप पर हुए इस हमले ने कूटनीति के सारे रास्ते लगभग बंद कर दिए हैं और खाड़ी देशों में एक बार फिर पूर्ण युद्ध का खतरा मंडराने लगा है।