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सरकारी कर्मचारियों की अटेंडेंस
सरकारी कर्मचारियों की अटेंडेंस
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सरकारी कर्मचारियों की हाजिरी पर सख्ती, फेस रिकग्निशन से दर्ज होगी अटेंडेंस

फील्ड ड्यूटी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आधार-इनेबल्ड फेस रिकग्निशन और रियल टाइम जियो-लोकेशन आधारित अटेंडेंस सिस्टम लागू करने की संभावना पर विचार कर रही है। आईटी ब्रांच इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करेगी। वहीं बायोमीट्रिक मशीनों में खराबी और संभावित छेड़छाड़ को देखते हुए उन्हें CCTV निगरानी में रखने की तैयारी है।

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प्रकाशित: 19 Aug 2026, 11:26 AM · अपडेट: 03 Oct 2026, 02:24 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों की हाजिरी दर्ज करने की व्यवस्था में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। खास तौर पर फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आधार-इनेबल्ड फेस रिकग्निशन सिस्टम लागू करने की तैयारी की जा रही है। प्रस्ताव के मुताबिक फेस रिकग्निशन के साथ रियल टाइम जियो-लोकेशन को भी जोड़ा जाएगा, जिससे अटेंडेंस दर्ज करते समय कर्मचारी की लोकेशन का पता लगाया जा सकेगा। नई व्यवस्था को लागू करने से पहले इसकी तकनीकी व्यवहार्यता की जांच की जाएगी। 

IT ब्रांच तैयार करेगी फिजिबिलिटी रिपोर्ट

सरकार ने आईटी ब्रांच को प्रस्ताव की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी है। रिपोर्ट में तकनीकी जरूरतों और सिस्टम को लागू करने की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा। इसके बाद सरकार आगे का निर्णय ले सकती है। दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों, जिला कार्यालयों और संस्थानों में फिलहाल बायोमीट्रिक सिस्टम के जरिए कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज की जाती है। 

बायोमीट्रिक सिस्टम में आ रही परेशानी

हाल में हुई समीक्षा के दौरान सामने आया कि कई कार्यालयों से नियमित रूप से बायोमीट्रिक अटेंडेंस रिपोर्ट नहीं मिल रही है।

इसके पीछे मशीनों में बार-बार खराबी और फील्ड कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को प्रमुख कारण बताया गया। फील्ड ड्यूटी पर रहने वाले कर्मचारियों के लिए हर बार कार्यालय पहुंचकर बायोमीट्रिक मशीन पर उपस्थिति दर्ज करना संभव नहीं होता।

लोकेशन से मौजूदगी की पुष्टि

प्रस्तावित सिस्टम में फेस रिकग्निशन एप्लीकेशन के जरिए कर्मचारी की पहचान सत्यापित की जाएगी। इसके साथ रियल टाइम जियो-लोकेशन भी दर्ज करने की योजना है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि संबंधित अधिकारी या कर्मचारी अटेंडेंस दर्ज करते समय निर्धारित फील्ड लोकेशन पर मौजूद था या नहीं। नई तकनीक लागू होने पर खास तौर पर उन विभागों को फायदा हो सकता है, जिनके कर्मचारियों को नियमित रूप से कार्यालय से बाहर जाकर काम करना पड़ता है। दूसरी ओर, विभिन्न सरकारी कार्यालयों में लगी बायोमीट्रिक मशीनों के बार-बार खराब होने की शिकायतों को देखते हुए उनकी निगरानी बढ़ाने की तैयारी है। 

मशीनों पर भी CCTV की नजर

जांच के दौरान कुछ मशीनों के अंदर पानी मिलने की बात सामने आई, जबकि आसपास पानी का कोई स्पष्ट स्रोत नहीं पाया गया। इसके बाद मशीनों के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ किए जाने की आशंका भी जताई गई। अब जिला कार्यालयों, विभागीय संस्थानों और मुख्यालयों में लगी बायोमीट्रिक मशीनों को CCTV कैमरों की निगरानी में रखने की व्यवस्था की जा रही है। इससे मशीनों के आसपास होने वाली गतिविधियों की निगरानी हो सकेगी। मशीन खराब होने पर यह पता लगाने में भी मदद मिल सकती है कि समस्या तकनीकी थी या किसी तरह की छेड़छाड़ की गई थी।

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