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जर्जर शासकीय स्कूल भवन
जर्जर शासकीय स्कूल भवन
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प्रहार : नरसिंहपुर में नया सत्र शुरू, पर मानसून की आहट से मंडराया जान का खतरा 

प्रशासनिक उदासीनता: शिक्षा व्यवस्था के नाम पर आने वाले करोड़ों रुपये के बजट के बावजूद धरातल पर सुधार शून्य है। आला अधिकारियों ने अब तक इन भवनों की मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं, जिससे स्थानीय लोगों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
16 Jun 2026, 03:03 PM
नरसिंहपु , मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में आज से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है। स्कूलों में घंटी बज चुकी है और शिक्षक समय पर पहुंचकर कक्षाओं को व्यवस्थित करने और बच्चों के स्वागत की तैयारियों में जुट गए हैं। चारों तरफ नए सत्र को लेकर उत्साह तो है, लेकिन इस उत्साह के पीछे एक खौफनाक हकीकत भी छिपी है, जो हर साल बारिश के मौसम में सामने आती है।

सहारा और खुले आसमान नीचे पढ़ाई

अगर पिछले साल की तस्वीरों पर गौर करें, तो अव्यवस्था की रूह कपां देने वाली कहानियां सामने आती हैं। बरसात से बचने के लिए मासूम बच्चों को कहीं तिरपाल तानकर बैठना पड़ा, तो कहीं मजबूरी में जर्जर भवन को छोड़कर खुले आसमान के नीचे या पेड़ की छांव में पढ़ाई करनी पड़ी। कुछ जगहों पर तो ग्रामीणों और शिक्षकों ने मिलकर किराए के कमरों में अस्थाई स्कूल चलाया। 

करोड़ों का बजट पर ग्राउंड जीरो पर शून्य  

 डॉट कॉम की टीम ने जब जमीनी स्तर पर जाकर इन स्कूलों का जायजा लिया, तो कड़वी सच्चाई सामने आई। स्कूल के शिक्षकों, ग्राम पंचायत के सरपंचों और अभिभावकों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और स्कूलों के रख-रखाव के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट जारी होता है

भारत के भविष्य पर सवाल

नया सत्र शुरू होने और मानसून के सिर पर होने के बावजूद जिले के आला अधिकारियों ने इन जर्जर बिल्डिंगों की मरम्मत या बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि अगर देश का भविष्य कहे जाने वाले ये नौनिहाल खौफ के साए में पढ़ेंगे, तो 'पढ़ेगा इंडिया, तो बढ़ेगा इंडिया' का नारा कैसे सच होगा 

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