होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों की कड़ी निंदा, भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर जताई गहरी चिंता
होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों को लेकर भारत ने UNSC में कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारत ने हमलों की निंदा करते हुए समुद्री सुरक्षा, जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही और मध्य पूर्व में तनाव कम करने की मांग की है। भारत ने खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले करीब 1 करोड़ भारतीयों और अपने व्यापारिक हितों को देखते हुए शांति और स्थिरता की जरूरत पर जोर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों पर हाल ही में हुए हमलों को लेकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बेहद कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने इन हमलों की पुरजोर शब्दों में निंदा करते हुए प्रभावित क्षेत्र में तुरंत तनाव कम करने और शांति बहाल करने की पुरजोर पैरवी की है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने सुरक्षा परिषद की एक अहम बैठक के दौरान इस बात पर गहरा दुख जताया कि इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की जान चली गई, जबकि एक नाविक अभी भी लापता है। इसके अलावा कई अन्य भारतीय नागरिक इन घटनाओं में घायल हुए हैं।
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की अध्यक्षता में बुलाई गई इस विशेष बैठक को संबोधित करते हुए राजदूत पी. हरीश ने कहा:
"हम इस महीने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले 'GFS गैलेक्सी', 'MT अल बाहिया' और 'MT मोम्बासा' जैसे कमर्शियल जहाजों पर हुए घातक हमलों की सख्त निंदा करते हैं।"
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि निर्दोष समुद्री यात्रियों (सेकंडरी से लेकर क्रू मेंबर्स) को निशाना बनाना और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर जहाजों की मुक्त आवाजाही में बाधा डालना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। भारत हमेशा से हिंसा का विरोध करता रहा है और इस संवेदनशील क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए केवल बातचीत व कूटनीति का समर्थन करता है।
सुरक्षा परिषद के सामने भारत की प्रमुख मांगें
भारत ने UNSC के मंच से दुनिया के सामने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट मांग उठाई:
नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा: मर्चेंट शिपिंग और आम नागरिक सुविधाओं पर हो रहे हमलों को तुरंत रोका जाए।
समुद्री आवाजाही की आजादी: अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले व्यापार और समुद्री परिवहन को बिना किसी डर या रुकावट के फिर से शुरू किया जाए।
मध्य पूर्व में भारत का बड़ा दांव: 1 करोड़ भारतीयों का सवाल
भारतीय कूटनीति के लिहाज से मध्य पूर्व (खाड़ी क्षेत्र) बेहद खास स्थान रखता है। राजदूत हरीश ने बैठक में इसके आर्थिक और सामाजिक पहलुओं के आंकड़ों के साथ भारत की चिंताओं को सामने रखा:
| पहलू | खाड़ी क्षेत्र (Middle East) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी |
| भारतीय समुदाय | लगभग 1 करोड़ (10 मिलियन) भारतीय वहां रहते और काम करते हैं। |
| वार्षिक व्यापार | भारत और खाड़ी देशों के बीच करीब 180 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है। |
| विदेशी निवेश (FDI) | इस क्षेत्र से भारत में 31 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है। |
| रेमिटेंस (कमाई) | खाड़ी देशों (GCC) में बसे भारतीय हर साल करीब 52 अरब डॉलर अपने घर भेजते हैं। |
पी. हरीश ने जोर देकर कहा कि वहां रह रहे करोड़ों भारतीयों की सुरक्षा और भलाई भारत सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है। इसके अलावा भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए इस इलाके में शांति और सुरक्षा भारत के हित में सबसे जरूरी है।