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महापौर ने कराया महिला का अंतिम संस्कार
महापौर ने कराया महिला का अंतिम संस्कार
अंबिकापुर (सरगुजा)

प्रेम विवाह का दर्दनाक अंजाम : मौत के बाद भी नहीं मिला परिवार का सहारा

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में प्रेम विवाह करने के कारण सामाजिक बहिष्कार झेल रही एक महिला की मौत के बाद भी परिजन और समाज अंतिम संस्कार के लिए आगे नहीं आए। मामले की जानकारी मिलने पर नगर निगम की महापौर मंजूषा भगत ने पहल करते हुए अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था कराई और महिला को सम्मानजनक अंतिम विदाई दिलाई। यह घटना सामाजिक सोच और मानवता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 31 Jul 2026, 02:44 PM · अपडेट: 02 Nov 2026, 10:11 PM
सरगुजा
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मुख्यालय अंबिकापुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत और सामाजिक सोच पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रेम विवाह करने के कारण जीवनभर सामाजिक बहिष्कार झेलने वाली एक महिला को निधन के बाद भी अपने परिजनों और समाज का साथ नसीब नहीं हुआ। अंततः नगर निगम की महापौर मंजूषा भगत ने आगे आकर महिला के अंतिम संस्कार की व्यवस्था कराई और उन्हें सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी।

पहले पति के निधन के बाद किया था प्रेम विवाह

जानकारी के मुताबिक, अंबिकापुर के शंकरनगर क्षेत्र में रहने वाली सावित्री बाई के पहले पति का कई वर्ष पहले निधन हो गया था। पति की मृत्यु के बाद उन्होंने अपनी इच्छा से दूसरी शादी की, जो प्रेम विवाह था। बताया जाता है कि इस फैसले के बाद समाज के कुछ लोगों ने उनका बहिष्कार कर दिया। समय के साथ परिवार से भी उनके संबंध लगभग खत्म हो गए और वह सामाजिक रूप से अलग-थलग पड़ गईं।

निधन के बाद अंतिम संस्कार के लिए भी कोई नहीं आया

सावित्री बाई के निधन के बाद हालात और भी दर्दनाक हो गए। उनके अंतिम संस्कार के लिए न तो परिवार का कोई सदस्य आगे आया और न ही समाज के लोगों ने कोई जिम्मेदारी निभाई। लंबे समय तक उनके अंतिम संस्कार की व्यवस्था नहीं हो सकी, जिससे यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया। घटना की जानकारी मिलने पर अंबिकापुर नगर निगम की महापौर मंजूषा भगत स्वयं मौके पर पहुंचीं। उन्होंने अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था कराई और महिला को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दिलाई। उनके इस मानवीय कदम की स्थानीय स्तर पर सराहना की जा रही है।

समाज के सामने खड़े हुए कई अहम सवाल 

यह घटना केवल एक महिला की व्यक्तिगत कहानी नहीं है, बल्कि समाज की सोच पर भी गहरा सवाल खड़ा करती है। किसी व्यक्ति के निजी फैसले, विशेषकर प्रेम विवाह, के कारण उसे जीवनभर सामाजिक बहिष्कार झेलना पड़े और मृत्यु के बाद भी सम्मानजनक अंतिम संस्कार न मिले, यह एक गंभीर सामाजिक चिंता का विषय है। फिलहाल यह घटना अंबिकापुर और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन अंतिम संस्कार जैसे मानवीय कर्तव्य को सामाजिक या व्यक्तिगत विवादों से ऊपर रखा जाना चाहिए। कई लोगों ने इस घटना को समाज के लिए आत्ममंथन का विषय बताते हुए ऐसी मानसिकता में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया।
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