बागबाहरा से झलप का ऐसा अनोखा एडवेंचर सफर पर, जहां रास्ता आपकी गाड़ी की पावर, सस्पेंशन और चालक की ड्राइविंग क्षमता—तीनों का एक साथ टेस्ट लेता है। यहां हर कुछ दूरी पर नई चुनौती आपका इंतजार करती है। कहीं गहरी नाली, कहीं विशाल गड्ढा, कहीं धंसा हुआ सड़क का किनारा तो कहीं बारिश में पानी के नीचे छिपा ‘सरप्राइज गड्ढा’। सफर के अंत तक अगर आपकी गाड़ी और आप दोनों सुरक्षित पहुंच गए तो समझिए एडवेंचर की परीक्षा पास!
भानपुर मोड़ से शुरू होती है परीक्षा
इस मार्ग पर सफर की शुरुआत ही भानपुर मोड़ से होती है, जहां सड़क के बीचों-बीच चौड़ा और गहरा कटाव वाहन चालकों के लिए पहली चुनौती बनकर खड़ा है। सड़क के एक छोर से दूसरे छोर तक गहरी और चौड़ी नालीनुमा बनी हुई है। इसे पार करना किसी इम्तिहान से कम नहीं।
आगे वेयर हाउस के पास सड़क के दोनों तरफ चौड़े और गहरे गड्ढे अगली परीक्षा लेते हैं। हालत ऐसी है कि छोटी गाड़ी असंतुलित हो तो पलटने तक की नौबत बन सकती है। यहां से गाड़ी बचाकर निकलना ही किसी उपलब्धि से कम नहीं।
नरतोरा में गड्ढों और नालियों का इम्तिहान
वेयर हाउस पार करते ही नरतोरा में सड़क काटकर बनाई गई गहरी-चौड़ी नालियां और बड़े गड्ढे वाहन चालकों का अगला इम्तिहान लेते हैं। यहां चालक को हर कदम पर यह देखना पड़ता है कि गाड़ी किस तरफ से निकले, ताकि पहिया गड्ढे या नाली में न उतर जाए। नरतोरा पार करना भी किसी एडवेंचर से कम नहीं।
पचरी में गड्ढों का महापरीक्षण
नरतोरा पार करने के बाद पचरी गांव के भीतर करीब 6 इंच से लेकर 2-3 फीट तक गहरे तालाबनुमा गड्ढे वाहन चालकों की परीक्षा लेते हैं। एक गड्ढे से बचो तो दूसरा स्वागत को तैयार। बिना गाड़ी को नुकसान पहुंचाए पचरी पार कर लेना अब लोगों के लिए जंग जीतने जैसी खुशी बन गया है।बड़े गड्ढों से पार करते ही सड़क के बीचों-बीच गहरा और चौड़ा गड्ढा सामने मिल जाता है। आप दाएं जाएं या बाएं, सड़क का किनारा अंदर धंसा हुआ ही मिलेगा। यानी यहां गाड़ी चलाना कम और गड्ढों के बीच से सही रास्ता तलाशना ज्यादा जरूरी हो गया है।
बारिश में यही गड्ढे पानी से भरकर अपनी गहराई छिपा लेते हैं। अनजान राहगीर सड़क समझकर आगे बढ़ता है और अचानक पहिया गड्ढे में जा धंसता है। लोगों का तंज है—“गड्ढों से डर नहीं लगता साहब, डर तो तब लगता है जब गड्ढा अचानक स्वीमिंग पूल बन जाता है।”
रिपेयरिंग हुई, राहत नहीं मिली
मार्ग पर रिपेयरिंग का काम हुआ, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार कई हिस्सों की हालत आज भी जस की तस है। जिन स्थानों की ज्यादा चर्चा हुई, वहां काम जरूर हुआ, लेकिन डाली गई गिट्टी कई जगह उखड़कर फैल गई। गड्ढे भरने की उम्मीद थी, लेकिन कई जगह उनकी गहराई और बढ़ती नजर आ रही है।
छोटी गाड़ियों के अंदर बैठे लोग जोरदार झटकों से सहम जाते हैं कि कहीं वाहन अनियंत्रित होकर पलट न जाए।
छिलपावन के पहले सड़क छोड़ो तो भी मुसीबत छिलपावन पहुंचने से पहले गड्ढे से बचने के लिए वाहन को सड़क से नीचे उतारना भी आसान नहीं। सड़क के किनारे का हिस्सा और कॉलर तक ठीक नहीं है। वाहन जैसे ही नीचे उतरे, गहरे हिस्से में धंसने और नुकसान होने का खतरा बना रहता है।

यानी सड़क पर रहो तो गड्ढा, गड्ढे से बचने नीचे उतरो तो धंसा हुआ किनारा—राहगीर जाए तो जाए कहां?
छिलपावन में आखिरी परीक्षा और बोर्ड का व्यंग्य
छिलपावन गांव के भीतर भी गड्ढों और उखड़ी सड़क से राहत नहीं मिलती। लेकिन इन सबके बीच सड़क किनारे लगा बोर्ड राहगीरों का ध्यान खींचता है—“धन्यवाद, पुनः पधारें!”
सड़क की हालत में यह बोर्ड अब सामान्य संदेश कम और व्यंग्य ज्यादा लगता है। मानो पूरी यात्रा में गाड़ी बचाकर पहुंचने वाले से कहा जा रहा हो—“आज बच गए? बहुत खूब... अगली बार फिर आइए!”
रात में गड्ढे दिखाई नहीं देने से दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है। खराब सड़क से वाहनों के टायर, पहिए और निचले हिस्से को नुकसान होने की शिकायतें हैं। कई लो
गों ने परेशानी से बचने के लिए रास्ता तक बदल लिया है।
इस मार्ग की बदहाली का मुद्दा कीर्तिमान द्वारा पहले भी समाचार के माध्यम से उठाया जा चुका है। ग्रामीणों ने भानपुर मोड़, वेयर हाउस, नरतोरा, पचरी और छिलपावन सहित पूरे मार्ग की स्थायी और गुणवत्तापूर्ण मरम्मत की मांग की है।
फिलहाल बागबाहरा-झलप रोड का हाल यही है—पहले परीक्षा, फिर गड्ढों से जंग और अंत में बोर्ड का संदेश: “धन्यवाद, पुनः पधारें!” यानी सड़क कम, एडवेंचर ज्यादा... फर्क सिर्फ इतना कि यहां टिकट नहीं लगती बस नुकसान आपकी गाड़ी उठाती है।