भारतीय सेना ने जब से अपने पहले 'इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स' (IBGs) को ऑपरेशनल (पूरी तरह सक्रिय) करने का एलान किया है, तब से सीमा पार पाकिस्तान के रक्षा गलियारों में बेचैनी का माहौल है। पाकिस्तानी डिफेंस एक्सपर्ट्स लगातार इस बात को लेकर चिंता जता रहे हैं कि भारत के इस कदम के बाद युद्ध की स्थिति में इस्लामाबाद को संभलने का मौका भी नहीं मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब भारतीय सेना बिना किसी देरी के, महज़ कुछ ही मिनटों के भीतर जवाबी या आक्रामक कार्रवाई शुरू करने की ताकत हासिल कर चुकी है। दरअसल, इस बेहद आक्रामक सैन्य रणनीति की जड़ें साल 2004 के 'कोल्ड स्टार्ट डॉक्ट्रिन' से जुड़ी हैं, जिसका मकसद परमाणु युद्ध के खतरे के बीच दुश्मन को पलक झपकते ही सीमित युद्ध में शिकस्त देना था। अब यह रणनीति ज़मीन पर उतरती दिख रही है।
पाकिस्तानी थिंक टैंक ने उठाए सवाल
रुद्र ब्रिगेड बनाम IBG: खान का सवाल है कि जब पिछले साल ही भारत ने 'रुद्र ब्रिगेड' के कॉन्सेप्ट को सामने रखा था, तो फिर अचानक IBG को फाइनल करने की जरूरत क्यों पड़ी?
रणनीतिक बदलाव: क्या ये नए बैटल ग्रुप्स रुद्र ब्रिगेड की जगह लेंगे, या दोनों मिलकर काम करेंगे?
तैनाती और कमान: इन ग्रुप्स को सीमा पर कब तैनात किया जाएगा, इनकी सटीक बनावट कैसी होगी और कमान किसके हाथ में होगी?
सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर
पाकिस्तानी विश्लेषक का साफ कहना है कि IBG को खास तौर पर इस तरह डिजाइन किया गया है कि परमाणु युद्ध की धमकियों के बीच भी पाकिस्तान के खिलाफ तुरंत और बड़ा आक्रामक ऑपरेशन शुरू किया जा सके। यही वजह है कि इसकी हर हलचल पर पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां पैनी नजर रख रही हैं। आसान शब्दों में कहें तो इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (IBG) भारतीय सेना का एक बेहद आधुनिक, फुर्तीला और 'ऑल-इन-वन' (आत्मनिर्भर) लड़ाकू दस्ता है। इसका इकलौता मकसद है—कम से कम समय में दुश्मन पर अचूक और विनाशकारी हमला करना।| पुरानी व्यवस्था | नई IBG व्यवस्था |
| युद्ध के समय पैदल सेना (इन्फैंट्री), टैंक (आर्मर्ड), तोपखाने (आर्टिलरी) और सिग्नल्स को अलग-अलग मुख्यालयों से बुलाकर एक कमान के तहत लाना पड़ता था। | यह एक 'ऑल-आर्म्स' फॉर्मेशन है। इसमें इन्फैंट्री, तोपखाना, एयर डिफेंस, टैंक, कॉम्बैट इंजीनियर्स और सिग्नल्स के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स (सप्लाई और फील्ड हॉस्पिटल) पहले से ही एक ही कमांडर के अधीन जुड़े होते हैं। |
| इस मोबिलाइजेशन (सेना को मोर्चे पर जुटाने) में कई दिनों का कीमती समय बर्बाद हो जाता था। | आदेश मिलते ही यह ग्रुप 12 से 48 घंटे के भीतर तुरंत हमला करने या दुश्मन के वार को रोकने के लिए पूरी तरह तैयार रहता है। |
दोनो देशों के बीच तनाव चरम पर
अब्दुल मोइज खान के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के बीच जब भी तनाव चरम पर होगा, इन बैटल ग्रुप्स की फॉरवर्ड तैनाती कर दी जाएगी। साल 2019 (बालाकोट के बाद का घटनाक्रम) और 2025 में भारत के आक्रामक रुख को देखते हुए पाकिस्तान को डर है कि भारत का राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व 'प्री-एम्प्टिव ऑपरेशन' (दुश्मन के हमले से पहले ही उस पर हमला कर देना) के लिए IBG को हरी झंडी दे सकता है।
पाकिस्तान के बाद चीन के मोर्चे पर भी असर की आशंका
शुरुआती दौर में ये ग्रुप्स तेजी से पाकिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर रणनीतिक ठिकानों को तबाह कर सकते हैं। हालांकि, पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स ने यह चेतावनी भी दी है कि भले ही इसे पाकिस्तान को ध्यान में रखकर बनाया गया हो, लेकिन इस घातक फॉर्मेशन का इस्तेमाल चीन के खिलाफ एलएसी (LAC) पर भी उतनी ही सटीकता से किया जा सकता है। पाकिस्तानी विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ एक बैटल ग्रुप बनाना तो शुरुआत भर है, भारतीय सेना का असली प्लान ऐसे कई आत्मनिर्भर ग्रुप्स तैयार करना है जो स्वतंत्र रूप से अलग-अलग मोर्चों पर एक साथ काम कर सकें।
बढ़े सैन्य कार्रवाई के दायरे
साफ है कि भारत अब पाकिस्तान की 'परमाणु ब्लैकमेलिंग' की परवाह किए बिना पारंपरिक सैन्य कार्रवाई के दायरे को बढ़ाने के विकल्पों पर काम कर चुका है। 'नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर' (बिना आमने-सामने आए तकनीक से लड़ना) के साथ-साथ IBG भारत को एक ऐसा व्यावहारिक और आक्रामक सैन्य विकल्प देता है, जो भविष्य के किसी भी संकट में पाकिस्तान के होश उड़ाने के लिए काफी है।