रीवा जिला अंतर्गत जवा जनपद की सोहावल खुर्द ग्राम पंचायत से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो प्रशासनिक व्यवस्था और विकास के तमाम बड़े दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पंचायत के गढ़ुआई टोला से सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में गांव के लोग एक 12 साल के बीमार बच्चे को कपड़े की पालकी में टांगकर कीचड़ भरे रास्ते से ले जाते दिख रहे हैं। गढ़ुआई टोला मुख्य रूप से आदिवासी बहुल बस्ती है।
बीमार को अस्पताल पहुंचा एक चुनौती
स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में गांव की कच्ची सड़क दलदल में बदल जाती है। हालत यह हो जाती है कि इस रास्ते पर पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं रहता। ऐसी स्थिति में अगर कोई अचानक बीमार पड़ जाए, तो अस्पताल तक पहुंचना एक जंग जीतने जैसा हो जाता है। मजबूरी में ग्रामीणों को खाट या कपड़े की झोली बनाकर मरीज को मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है।
मिला सिर्फ आश्वासन सड़क नहीं
गांव वालों का साफ तौर पर कहना है कि वे बीते कई सालों से इस सड़क को पक्का करवाने के लिए गुहार लगा रहे हैं, लेकिन आज तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। कागजों पर तो पंचायत स्तर पर विकास की बड़ी-बड़ी योजनाएं दिखाई जाती हैं, लेकिन धरातल पर हकीकत बेहद दयनीय है। ग्रामीणों का आरोप है कि न तो क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने कभी उनकी सुध ली और न ही प्रशासनिक अफसरों ने इस ओर कोई ध्यान दिया।सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं और बच्चों को
आजादी के दशकों बीत जाने के बाद भी यह बस्ती मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को उठानी पड़ती है।वायरल वीडियो के सामने आने के बाद अब ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। गांव वालों की अपील है कि गढ़ुआई टोला की इस कच्ची सड़क का जल्द से जल्द डामरीकरण या पक्कीकरण कराया जाए, ताकि लोगों को नरकीय जीवन से राहत मिल सके। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले पर जिला प्रशासन कितनी जल्दी संज्ञान लेता है और ग्रामीणों को इस समस्या से कब तक मुक्ति मिलती है।