अछोली ग्राम पंचायत में स्थित पिकाडली शराब फैक्ट्री के खिलाफ सोमवार को ग्रामीणों का आक्रोश सड़कों पर उतर आया। सड़क की बदहाली, फैक्ट्री से फैल रहे प्रदूषण, स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिलने और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने फैक्ट्री के मुख्य द्वार पर धरना-प्रदर्शन किया। धरने की सबसे भावुक तस्वीर उस समय सामने आई जब तेज बारिश शुरू होने पर भी स्कूल यूनिफॉर्म में पहुंचे बच्चे फैक्ट्री गेट के बाहर भीगते रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि बच्चों ने बारिश से बचने के लिए फैक्ट्री परिसर के शेड में जाने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने गेट नहीं खोला। करीब 15 से 20 मिनट तक बच्चे बारिश में भीगते रहे। बाद में ग्रामीणों के विरोध के बाद गेट खोला गया। इस घटना ने प्रदर्शन को और उग्र बना दिया।
5 दिन का वादा टूटा, फिर भड़क उठा गांव
ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले भी इसी मुद्दे पर कंपनी प्रबंधन और प्रशासन के साथ बैठक हुई थी। उस समय कंपनी ने पांच दिनों के भीतर सड़क की मरम्मत कराने का भरोसा दिया था। यह आश्वासन केवल मौखिक था। तय समय गुजर जाने के बाद भी सड़क पर कोई काम शुरू नहीं हुआ। इससे नाराज होकर पूरा गांव एकजुट होकर फैक्ट्री के सामने पहुंच गया।
ग्रामीणों का कहना है कि अब वे केवल आश्वासन नहीं, जमीन पर काम देखना चाहते हैं।
सड़क नहीं, दलदल बन गया रास्ता
धरने का सबसे बड़ा मुद्दा सड़क रहा। ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री के लिए रोजाना भारी ट्रकों की आवाजाही होती है। कई ट्रक 60 टन तक भार लेकर गुजरते हैं, जिससे सड़क पूरी तरह टूट चुकी है। बारिश में पूरा रास्ता कीचड़ और गहरे गड्ढों में बदल जाता है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि गड्ढे भरने या अस्थायी मरम्मत से अब काम नहीं चलेगा। ऐसी सीसी या मजबूत सड़क बनाई जाए जो लंबे समय तक भारी वाहनों का भार सह सके।
बच्चों की पढ़ाई पर संकट
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में केवल आठवीं तक स्कूल है। इसके बाद बच्चों को पांच किलोमीटर दूर बोरिंग गांव जाना पड़ता है। वहां भी गणित विषय की पढ़ाई नहीं होने के कारण गणित से हायर सेकेंडरी करने वाले छात्रों को 10 से 12 किलोमीटर दूर तुमगांव जाना पड़ता है। बारिश के दिनों में टूटी सड़क पर साइकिल से स्कूल जाना बच्चों के लिए जोखिम भरा होता है। कई बार बच्चे फिसलकर गिर चुके हैं। दुर्घटना के डर और खराब सड़क की वजह से कई छात्र नियमित स्कूल भी नहीं जा पाते।
प्रदूषण से भी परेशान ग्रामीण
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री का दूषित पानी बाहर निकलकर नालों और आसपास के जल स्रोतों में पहुंच रहा है। इससे बदबू फैल रही है और पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि कंपनी प्लांट के भीतर ही दूषित पानी का उपचार करे और किसी भी हालत में उसे बाहर न छोड़े।
स्थानीय युवाओं को नहीं मिल रहा रोजगार
धरने में ग्रामीणों ने स्थानीय युवाओं की अनदेखी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि गांव के पढ़े-लिखे युवाओं को रोजगार देने के बजाय बाहर के लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। कंपनी स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता दे।
प्रशासन ने दिया आश्वासन, ग्रामीण नहीं माने
सूचना मिलने पर तहसीलदार, पीडब्ल्यूडी के अधिकारी और कंपनी प्रबंधन के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि पक्की सड़क के लिए प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है और स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है। प्रशासन ने अगले 10 घंटे के भीतर गड्ढे भरकर सड़क को अस्थायी रूप से ठीक करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन ग्रामीणों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना था कि वर्षों से केवल अस्थायी मरम्मत होती रही है, जिसका कोई फायदा नहीं हुआ। अब केवल स्थायी सड़क बनने पर ही आंदोलन खत्म होगा।
कंपनी ने देरी की वजह बताई
कंपनी प्रबंधन का कहना है कि सड़क सुधार का काम शुरू करने की तैयारी थी, लेकिन आवश्यक निर्माण सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण पांच दिन में काम शुरू नहीं हो सका। प्रबंधन ने भरोसा दिलाया कि जल्द ही सड़क सुधार का कार्य शुरू किया जाएगा।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- 60 टन तक के भारी वाहनों का भार सहने वाली मजबूत पक्की सड़क।
- सड़क पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था।
- फैक्ट्री के दूषित पानी को बाहर छोड़ने पर रोक।
- गांव के तालाबों का सौंदर्यीकरण।
- गांव में हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल की स्थापना।
- स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता।