Voter List Update: छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने मतदाता सूची से करीब 25 लाख नाम हटाए जाने को लेकर निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। डहरिया ने कहा कि SIR के दौरान 24,99,823 मतदाताओं के नाम सूची से हटना सामान्य पुनरीक्षण की प्रक्रिया नहीं माना जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से कई पात्र नागरिकों के मताधिकार पर असर पड़ सकता है।
चुनावी अंतर से चार गुना ज्यादा नाम हटने का दावा
पूर्व मंत्री ने 2023 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा और कांग्रेस के बीच कुल मतों का अंतर 6,32,382 रहा था। इसके मुकाबले SIR के दौरान करीब 25 लाख मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए गए हैं। डहरिया ने कहा कि चुनाव में जीत-हार के अंतर से लगभग चार गुना अधिक मतदाताओं के नाम हटना पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
शिफ्टेड और एब्सेंट श्रेणी पर भी सवाल
डहरिया के मुताबिक, हटाए गए नामों में 19,13,540 मतदाताओं को ‘शिफ्टेड’ या ‘एब्सेंट’ श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने से पहले क्या पर्याप्त भौतिक सत्यापन किया गया और क्या प्रभावित लोगों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिला। उन्होंने निर्वाचन आयोग से इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी तरीके से समीक्षा कराने की मांग की है।
डहरिया के मुताबिक, हटाए गए नामों में 19,13,540 मतदाताओं को ‘शिफ्टेड’ या ‘एब्सेंट’ श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने से पहले क्या पर्याप्त भौतिक सत्यापन किया गया और क्या प्रभावित लोगों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिला। उन्होंने निर्वाचन आयोग से इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी तरीके से समीक्षा कराने की मांग की है।
हटाए गए नामों का आधार सार्वजनिक करने की मांग
डॉ. डहरिया ने मांग की कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनके संबंध में इस्तेमाल किए गए आधार और रिपोर्ट की जानकारी सार्वजनिक की जाए। उन्होंने कहा कि जांच के बाद पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में तत्काल बहाल किए जाने चाहिए। डहरिया ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है। कांग्रेस इस मुद्दे को जनता के बीच उठाने के साथ ही लोकतांत्रिक और कानूनी स्तर पर भी अपनी लड़ाई जारी रखेगी।

