World Suicide Prevention Day: जिला जेल में मानसिक स्वास्थ्य कार्यशाला, बंदियों को आत्महत्या रोकथाम की दी जानकारी
World Suicide Prevention Day: महासमुंद जिला जेल में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर मानसिक स्वास्थ्य कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें 110 बंदियों को तनाव प्रबंधन, आत्महत्या के संकेतों और मानसिक समस्याओं से निपटने की जानकारी दी गई। 15 बंदियों को विशेष उपचार के लिए चिन्हित किया गया।
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कीर्तिमान न्यूज
11 Sep 2026, 08:31 AM
महासमुंद
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World Suicide Prevention Day: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत, 10 सितंबर 2026 को जिला जेल महासमुंद में 'विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस' के अवसर पर एक विशेष मानसिक स्वास्थ्य कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. आई. नागेश्वर राव, मेडिकल सुप्रीटेंडेंट (M.S.) डॉ. बी. माहेश्वरी और जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) नीलू घृतलहरे लहरे के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
व्यवहार में बदलाव लाने काउंसलिंग
कार्यशाला का सफल समन्वय जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. सी. पी. चंद्राकर द्वारा किया गया। इस मानवीय पहल में जिला जेल अधीक्षक अश्वनी पूजा तुर्की का विशेष प्रशासनिक सहयोग रहा।इस वर्ष विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की वैश्विक थीम "चेंजिंग द नैरेटिव ऑन सुसाइड" (Changing the Narrative on Suicide) और इसके मुख्य आह्वान "स्टार्ट द कन्वर्सेशन" (Start the Conversation) के तहत कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार, उनके व्यवहार में बदलाव लाने और मनोरोगों की काउंसलिंग के लिए यह सत्र आयोजित किया गया।
जिला जेल में मानसिक स्वास्थ्य कार्यशालाआत्महत्या के प्रयास से पहले व्यवहार में बदलाव की दी जानकारी
कार्यशाला में जेल के कुल 110 बंदियों ने भाग लिया, जिनमें से 15 बंदियों को विशेष मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और उपचार के लिए चिन्हित किया गया। इनमें से 3 बंदी अल्कोहल विड्रॉल डिसऑर्डर (शराब छोड़ने के लक्षण), 2 एंग्जायटी (घबराहट/चिंता), 3 साइकोसिस (गंभीर मानसिक विकार), 2 डिप्रेशन (अवसाद), 2 सीज़र डिसऑर्डर (मिर्गी/दौरे) और 3 बंदी कैनबिस (गाँजा) की लत से पीड़ित पाए गए।चिकित्सीय विशेषज्ञों ने बंदियों को आत्महत्या के चेतावनी संकेतों (Warning Signs) के बारे में विस्तार से जागरूक किया। विशेषज्ञों ने बताया कि अत्यधिक अकेले रहना या सामाजिक दूरी बनाना, नशीली दवाओं या ड्रग्स पर पूरी तरह निर्भर हो जाना और आत्महत्या के प्रयास से ठीक पहले व्यवहार में आने वाले अचानक बदलावों को पहचान कर समय पर मदद पहुंचाई जा सकती है।
बंदियों को कराया गया योगा अभ्यास
तनाव प्रबंधन (Stress Management) के लिए बंदियों को कई व्यावहारिक तकनीकें सिखाई गईं। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं जिला अस्पताल के 'स्पर्श क्लिनिक' मानसिक स्वास्थ्य विभाग के योग ट्रेनर देव कुमार डडसेना ने बंदियों को ब्रीदिंग एक्सरसाइज (श्वास क्रिया), योग और ध्यान का व्यावहारिक अभ्यास कराया। इसके साथ ही साइकियाट्रिक सोशल वर्कर (PSW) आर. जी.खूँटे ईएनटी (ENT) विभाग से निर्मल कुमार साहू ने बंदियों को इनडोर गेम्स खेलने, क्लिनिकल साइकोसोशल काउंसलिंग, कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) और विड्रॉल व सीज़र के लक्षणों के मेडिकल मैनेजमेंट के महत्व को समझाया।सहयोगी टिकेश्वरी गिरी गोस्वामी – (CP)खोमन लाल साहू – सीनियर नर्सिंग ऑफिसर (SNO) आदि उपस्थित थे।